Lok Sabha Election 2019, लोकसभा चुनाव 2019
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सीता की गुफा, हनुमान जी का जन्म स्थल... ये जगहें नासिक को बनाता है कुछ खास

जानिए, नासिक में घूमने की टॉप जगहें, जो नासिक अपने मौसम की वजह से जाना जाता है। इस शहर का सबसे प्रमुख भाग है पंचवटी जो मां सीता के मंदिर के पास है। इसके अलावा यहां बहुत से मंदिर भी है।

By: एबीपी गंगा | Updated: 26 Apr 2019 11:30 AM
Top 10 best places to visit in nasik
एबीपी गंगा, नासिक सिर्फ मंदिरो या आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि गोदावरी नदी के चलते इस जगह को साउथ का हरिद्वार भी कहा जाता है। हर 12 साल के बाद कुंभ का मेला भी इसी जगह लगता है। नासिक अपने मौसम की वजह से भी फेमस है। गोदावरी नदी के तट पर बहुत से सुंदर घाट यहां की खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। इस शहर का सबसे प्रमुख भाग पंचवटी है। इसके अलावा यहां बहुत से मंदिर भी है। नासिक में त्योहारों के समय में बहुत अधिक संख्या में भीड़ दिखाई पड़ती है...तो चलिए हम भी बिना देर किए शुरू करते हैं नासिक का सफर।

पांडवलेनी गुफाएं



पांडवलेनी गुफाओं को पहले पांडव केवस भी कहा जाता था और यहां पर 24 गुफाओं को मिलाकर ये समूह तैयार हुआ है। पांडवलेनी गुफाओं में आपको बुद्ध की प्रतिमाएं नजर आएंगी। यहां पहुंचने के दौरान आपको थोड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी, लेकिन याकीन मानिए इतनी मेहनत के बाद जब आप यहां पर पहुंचेंगे तो थकान पूरी गायब हो जाएगी। ये गुफाएं महाराष्ट्र की सबसे पुरानी गुफाओं में से एक हैं यहां पर कुल गुफाओं की संख्या चौबीस है और जैन राजाओं द्वारा निर्मित मानी जाती हैं।

दादा साहेब फाल्के स्मारक



पांडवलेनी गुफाओं के पास लगभग 29 एकड़ में दादा साहेब फाल्के स्मारक अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। जिन लोगों का शांति पसंद है ऐसे लोगों के लिए भीड़भाड़ से दूर दादा साहेब फाल्के स्मारक किसी वरदान से कम नहीं है। भगवान बुद्ध की शानदार प्रतिमाएं, खूबसूरत लॉन, म्यूजिकल फाउंनटेन मेडिटेशन के लिए एक दम सटीक है। आप अपने पूरे परिवार के साथ यहां पर आकर खूबसूरत पलों को बिता सकते हैं। दादा साहेब फाल्के स्मारक में तो कई लोग आते है लेकिन काफी लोगों को ये पता नहीं है की यहां पर वस्तु संग्रालय भी है...तो जब भी आप यहां आएं तो वस्तु संग्रालय जाना बिलकुल न भूलें क्योंकि ये वो जगह हे जिसे आप मिस करना तो बिलकुल नहीं चाहेंगे।

पंडित जवाहरलाल नेहरू वन उद्यान



दादा साहेब फाल्के स्मारक से 500 मीटर की दूरी पर पंडित जवाहरलाल नेहरू वन उद्यान स्थित है। पंडित जवाहरलाल नेहरू वन उद्यान को botanical garden भी कहा जाता है। इस उद्यान में कई प्रकार के पेड़ पौधे उगाए जाते हैं जो प्राय: लुप्त माने जाते हैं। यहां पौधों से कई प्रकार की दवाईयां बनाई जाती हैं। आप नेचर से प्यार करते हैं तो ये जगह आपके लिए ही बनी है।

अंजनेरी हनुमान मंदिर



नासिक से 28 किमी की दूरी पर अंजनेरी मंदिर का खास महत्व है। माना जाता है कि भगवान हनुमान का जन्म यहीं हुआ था। अंजनेरी में हनुमान जी की माता अंजनी की बेहद खूबसूरत प्रतिमा है। यहां आने पर आपको अध्यात्म की एक नई अनुभूति होगी। तो यहां आना मिस नहीं करिएगा।

त्र्यंबकेश्वर



महाराष्‍ट्र घूमने निकले हैं तो शिरडी, भीमशंकर शिव मंदिर, एलोरा, एलिफेंटा गुफाओं के अलावा त्र्यंबकेश्वर मंदिर जाना ना भूलें। शिव जी के बारह ज्योतिर्लिगों में श्री त्र्यंबकेश्वर को दसवां स्थान दिया गया है। यह महाराष्ट्र में नासिक शहर से 35 किलोमीटर दूर गौतमी नदी के तट पर स्थित है। मंदिर के अंदर एक छोटे से गड्ढे में तीन छोटे-छोटे लिंग है, जिन्‍हें ब्रह्मा, विष्णु और शिव का प्रतीक माना जाता हैं। त्र्यंबकेश्‍वर की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इस ज्‍योतिर्लिंग में ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश तीनों ही विराजित हैं। काले पत्‍थरों से बना ये मंदिर देखने में बेहद सुंदर नजर आता है।

राम कुंड



नासिक में राम कुंड गोदावरी नदी पर स्थित है, जो असंख्य तीर्थयात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां भक्त स्नान के लिए आते हैं। माना जाता है कि भगवान राम ने यहां स्नान किया था। राम कुंड का निर्माण 1696 में चितारो खातरकर ने कराया था। मान्यता है कि इस पवित्र कुंड में किसी मृतक की अस्थियां बहाने से उसकी आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है। राम कुंड क्षेत्र में अन्य कई मंदिर भी आते हैं जैसे कि सुंदर नारायण मंदिर, नारो शंकर मंदिर और कापालीश्वरा मंदिर।

सीता गुफा



ऐसा माना जाता है कि भगवान राम के 14 वर्षों के दौरान, लक्ष्मण और मां सीता नासिक के पंचवटी क्षेत्र में रहे। पूरे पंचवटी क्षेत्र लगभग पांच किमी में फैला हुआ है। पंचवटी इसलिए बोला जाता है क्योकि वहां पांच बरगद के पेड़ आपस में जुड़े हुए है। ये पांच प्राचीन बरगद के पेड़ अभी भी सीता गुफा के आसपास स्थित हैं और संख्याओं के साथ चिह्नित हैं, ताकि आप उन्हें आसानी से पहचान सकें। नीचे एक बरगद के पेड़ की तस्वीर है जो सीता गुफा गुफा मंदिर के ठीक सामने है। आप आसानी से इस मंदिर को पहचान सकते हैं। यह मंदिर ज्यादा बड़ा तो नहीं लेकिन यह आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है क्योंकि सीता मैया ने यहां पर तपस्या,आराधना बनवास के समय में की थी। इसीलिए एक अलग तरीके की आध्यात्मिक ऊर्जा आपको महसूस करने को मिलेगी जो कि आपके मन में भक्ति और प्रेम का प्रवाह कर देगी। यह सीता गुफा नासिक में पंचवटी क्षेत्र के अंदर ही आता है। गुफा के अंदर जाने में 20 मिनट से एक घंटे लग सकते हैं।

सराफा बाजार



मुंबई से 150 किलोमीटर की दूरी पर बसा शहर नासिक अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। नासिक में सोने के दाम और सोने के गहनों को लेकर लोगों में हमेंशा से दिलचस्पी देखी गई है। नासिक में महाराष्ट्रियन शैली के गहने खास पसंद किए जाते हैं। नासिक में सोने के आभूषण की तमाम दुकाने हैं जहां से आप भी सोना खरीद सकते हैं। अगर आप को भी सोना खरीदने का शोक है तो आप यहां पर जरुर आएं।

सुला वाइनयार्ड



अगर आपको घूमने फिरने का शौक है और आप ट्रिप के दौरान कुछ अलग हटकर करना चाहती हैं तो आपको एक बार वाइनयार्ड टूरिज्‍म की ओर थोड़ा इंट्रेस्‍ट दिखाना चाहिए। जी हां, आप ने किले, गुफाएं, म्‍यूजियम्‍स और नेचर टूरिज्‍म तो कई बार किया होगा। मगर अब ट्रैवल के क्षेत्र का विस्‍तार हो रहा है और कुछ यूनीक आइडियज के साथ नई जगहों को टूरिज्‍म से जोड़ा जा रहा है। भारत में मौजूद वाइनयार्ड्स टूरिज्‍म भी इसी का हिस्‍सा है। इस वेस्‍टर्न ट्रैवल कलचर को अपनाया है सुला वाइनयार्ड्स ने। मुंबई से 180 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद नासिक शहर को उसके कलचर, नेचुरल ब्‍यूटी और खूबसूरत वाइनयार्ड्स के लिए जाना जाता है। यहां से कुछ ही दूर एक छोटा सा गांव है डिंडोरी। हरभरे पहड़ों और सुंदर सी झील से घिरा यह गांव बेहद खूबसूरत दिखता है। इस गांव में देश का सबसे मशहूर सुला वाइनयार्ड मौजूद है। इस वाइनयार्ड की फर्स्‍ट हार्वेस्‍ट 1999 में हुई थी। तब से इस वाइनयार्ड का दिन पर दिन विस्‍तार हो रहा है। हर रोज यहां पर 8 से 9 हजार टन के अंगूरों को क्रश करके वाइन तैयार की जाती है। इस वाइन की सेल न केवल भारत बल्कि दूसरे देशों में भी होती है।