चिन्मयानंद मामले में संतों का यू-टर्न, बहिष्कार का फैसला वापस, खुलकर देंगे समर्थन

स्वामी चिन्मयानंद यौन शोषण मामले में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के मुखिया महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि चिन्मयानंद के साथ अन्याय हुआ है। ऐसे में साधु-संतों की संस्था अखाड़ा परिषद उन्हें अकेले नहीं छोड़ सकती है।

By: एबीपी गंगा | Updated: 07 Oct 2019 03:35 PM
U turn of saints in Chinmayananda case, narendra giri we will give him open  support

प्रयागराज, एबीपी गंगा। एलएलएम छात्रा के यौन शोषण के आरोप में जेल भेजे गए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद के लिए राहत भरी खबर है। महानिर्वाणी अखाड़े से जुड़े चिन्मयानंद के मामले में साधू-संतों ने यू-टर्न लेते हुए संत समाज द्वारा उनके बहिष्कार के फैसले को न सिर्फ वापस ले लिया है, बल्कि अब खुलकर उनकी मदद करने का भी एलान किया है। संतों का कहना है कि वह लोग न सिर्फ चिन्मयानंद को कानूनी मदद मुहैया कराएंगे, बल्कि समाज में उनकी खराब हुई छवि को भी ठीक करने की कोशिश करेंगे।


Swami Chinmayanand


साधू संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के मुखिया महंत नरेंद्र गिरि का कहना है चिन्मयानंद साजिश का शिकार हुए हैं। उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। अखाड़ा परिषद ने इस मामले में संतों की टीम से जांच भी कराई थी और चिन्मयानंद का बयान भी लिया था। जांच में पाया गया कि ब्लैकमेलिंग कर करोड़ों रूपये ऐठने के लिए उन्हें पहले नशीला सामान खिलाकर बेसुध किया गया और उसके बाद में साजिश के तहत उनका वीडियो बनाया गया।


narendra giri


महंत नरेंद्र गिरि के मुताबिक इस बारे में 10 अक्टूबर से हरिद्वार में होने वाली अखाड़ा परिषद की बैठक में औपचारिक एलान करते हुए उनकी सहायता करने की रूपरेखा तय की जाएगी। उनका दावा है कि चिन्मयानंद ने अपने वकीलों पर भरोसा जताया है और कोई कानूनी मदद लेने से मना किया है। इसके बावजूद उन्हें जिस भी तरह की मदद की जरुरत होगी, वह सभी उन्हें मुहैया कराई जाएगी।


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नरेंद्र गिरि के मुताबिक चिन्मयानंद के साथ अन्याय हुआ है। ऐसे में साधु-संतों की संस्था अखाड़ा परिषद उन्हें अकेले नहीं छोड़ सकती। इस लड़ाई में संत समाज उनका पूरी तरह साथ देगा। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के इस बयान को यू-टर्न के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि महंत नरेंद्र गिरि ने ही 21 सितम्बर को बयान जारी कर चिन्मयानंद पर लगे आरोपों को शर्मनाक बताया था और उन्हें संत समाज से बहिष्कृत करने की बात कही थी। अपने बयान में उन्होंने कहा था कि चिन्मयानंद के कारनामे से समूचे संत समाज की छवि धूमिल हुई है।