हाईकोर्ट ने भी माना, प्रयागराज में ही खुले जीएसटी ट्रिब्यूनल

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जीएसटी से जुड़े मामलों की सुनवाई मुख्य पीठ में ही होनी चाहिये। कार्ट का कहना है कि ज्यादातर मामले इलाहाबाद में ही सुने जाते हैं, लखनऊ में इनकी संख्या कम है। ऐसी स्थिति में जीएसटी ट्रिब्युनल प्रयागराज में ही खुलना चाहिये।

By: एबीपी गंगा | Updated: 23 Aug 2019 06:08 PM
Highcourt said gst tribunal open in prayagraj

प्रयागराज, मोहम्मद मोइन। यूपी में प्रस्तावित जीएसटी अधिकरण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है। हाईकोर्ट का मानना है कि जीएसटी अभिकरण लखनऊ के बजाय प्रयागराज में ही खुलना चाहिए। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि इलाहाबाद में हाईकोर्ट की प्रधान पीठ में तकरीबन सत्तानबे फीसदी मुकदमों की सुनवाई होती है, जबकि लखनऊ पीठ के क्षेत्राधिकार में सिर्फ सवा तीन फीसदी केस ही आते हैं। ऐसे में जीएसटी अभिकरण प्रधान पीठ की ही जगह यानी प्रयागराज में ही खुलना चाहिए। यह आदेश जस्टिस एसडी सिंह की सिंगल बेंच ने दर्जनों याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया है।


हालांकि अपने फैसले में उन्होंने कहा है कि यूपी में खुल रहे नये अभिकरणों के बारे में तीस अगस्त को पांच जजों की लार्जर बेंच में सुनवाई होनी है। ऐसे में अंतिम निर्णय लार्जर बेंच से आने वाले फैसले में ही होगा। सिंगल बेंच के फैसले से जीएसटी अधिकरण अब लखनऊ के बजाय प्रयागराज में ही खुलने की संभावना और ज़्यादा बढ़ गई है। जस्टिस एसडी सिंह ने अपने फैसले में अधिकरण को प्रयागराज में खोलने के पीछे जो दलीलें दी हैं, वह तीस अगस्त से होने वाली सुनवाई में काफी अहम साबित होंगी। जस्टिस एसडी के फैसले में यह भी कहा गया है कि यूपी में जीएसटी अधिकरण के गठन में देरी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट पर मुकदमों का दबाव बढ़ा दिया है। इतना ही नहीं अधिकरण न होने की वजह से लोगो को विभागीय आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट के चक्कर भी लगाने पड़ रहे है।


अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि अधिकरण का गठन केंद्र सरकार को करना है। राज्य सरकार ने कोर्ट के निर्देश पर प्रयागराज में गठन का प्रस्ताव जी एस टी काउन्सिल को भेजा है। हालांकि लखनऊ और प्रयागराज के वकीलों द्वारा इसे अपने अपने शहरों में खोले जाने के लिए आंदोलन चलाए जाने की वजह से अभी तक अभिकरण का गठन नहीं हो सका है।


न्यायमूर्ति एस डी सिंह ने आंकड़ों के हवाले से स्पष्ट कर दिया है कि अधिकरण का गठन प्रयागराज में किया जाना चाहिए, क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधान पीठ के क्षेत्राधिकार वाले जिलो में 96.4 व लखनऊ पीठ के क्षेत्राधिकार वाले जिलो में 3.6 फीसदी जी एस टी मामले विचाराधीन है। विभाग में इस साल पंद्रह जुलाई तक 6163 अपील लंबित हैं, जिसमे से 480 लखनऊ पीठ के जिलों तथा 5683 अपील इलाहाबाद प्रधानपीठ के अधिकार क्षेत्र वाले जिलों की है। पंद्रह जुलाई तक 2339 अपीलें निर्णीत हुई है, जिसमे से लखनऊ पीठ के अधिकार क्षेत्र की 83 है और इलाहाबाद प्रधानपीठ के अधिकार क्षेत्र की 2254 अपीलें है। कोर्ट ने कहा स्थिति साफ है, जिस पीठ की अधिकारिता क्षेत्र में 96 फीसदी से ज़्यादा मुकदमे आते हो। अधिकरण वहीं बनना चाहिए। जीएसटी अधिकरण की तरह ही शिक्षा सेवा अभिकरण को भी प्रयागराज में ही खोले जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट व डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के वकील लगातारआंदोलन कर रहे हैं।