प्रयागराज: बेतहाशा पेड़ों की कटाई से हाईकोर्ट नाखुश, केन्द्र व राज्य सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट पेड़ों की कटाई पर नाराज है। इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका में कोर्ट ने केंद्र सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। इस पर अगली सुनावई 2 अगस्त को होगी।

By: एबीपी गंगा | Updated: 12 Jul 2019 09:13 PM
Allahabad highcourt concern about cutting of trees

प्रयागराज, एबीपी गंगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज शहर में हजारों की संख्या में पेड़ काटने और पर्याप्त संख्या में न लगाने के कारण पर्यावरण संतुलन बिगड़ने के मामले को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। अदालत ने इसके साथ ही यूपी सरकार से कहा है कि वह शहर में पेड़ लगाने व उनकी सुरक्षा उपायों पर जवाब दाखिल करें। याचिका की सुनवाई दो अगस्त को होगी।


यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति आर आर अग्रवाल की खंडपीठ ने छात्रा ज्योति वर्मा की जनहित याचिका पर दिया है। कोर्ट ने अधिवक्ता मनु खरे को न्यायमित्र नियुक्त किया है और कहा है कि वह शहर में लगे पेड़ों का निरीक्षण कर सुरक्षा उपायों के साथ अपनी रिपोर्ट पेश करें।


अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ए के गोयल ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2019-20 में नगर निगम का 2 लाख और पीडीए को 35 हजार पेड़ लगाने का लक्ष्य है। कोर्ट ने कहा कि एक निगरानी कमेटी बनाकर लगे पेड़ों की सुरक्षा निगरानी की जाए। केंद्र सरकार के अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी से कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ लगाने व उनकी सुरक्षा करने का फंड बनाने का आदेश दिया है, इस संबंध में की गयी कार्रवाई की जानकारी दी जाय। सरकारी वकील ने बताया कि शहर में 35 सौ पेड़ काटे गए हैं।और काफी संख्या में लगाये भी गए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि पेपर रिपोर्ट में एक लाख पेड़ काटे जाने का जिक्र है। जो पौधे लगाए गए हैं उनमें से 70 फीसदी सुरक्षा व् देखभाल न होने के कारण सूख गए हैं। ऐसा निगरानी तंत्र बनाये जिससे लगाये गये पेड़ों की सुरक्षा हो सके। याचिका की सुनवाई 2 अगस्त को होगी।