लखनऊ विश्वविद्यालय में समितियां बनाकर दबा रहे भ्रष्टाचार के मामले, तेज हुई CBI जांच की मांग

लखनऊ विश्वविद्यालय के खाते से 1 करोड़ 10 लाख रुपये गायब हो गए। विश्वविद्यालय इसका ठीकरा बैंक पर फोड़कर खुद की खामियां छुपाने की कोशिश करता नजर आ रहा है। जबकि, इस मामले में विवि का लेखा विभाग भी कम लापरवाह नहीं है।

By: एबीपी गंगा | Updated: 07 Oct 2019 06:01 PM
Corruption cases in Lucknow University demand for CBI inquiry

लखनऊ, शैलेष अरोड़ा। लखनऊ विश्वविद्यालय में फर्जीवाड़े के कई मामले सिर्फ जांच के नाम पर समितियां बनाकर ठंडे बस्ते में डालने का खेल चल रहा है। फर्जी मार्कशीट का मामला हो या पोर्टल पर अंकों से छेड़छाड़ करने का सभी मामले में अब तक कुछ साफ नहीं हो सका है। इन सबके बाद अब सामने आया है फर्जी चेक से 1 करोड़ 10 लाख रुपये खाते से उड़ाने का मामला। सभी मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में आ चुकी है। इन मामलों को लेकर लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ CBI जांच की मांग कर रहा है।


समिति बनाने तक सिमटा फर्जी मार्कशीट का मामला
लखनऊ विवि की फर्जी मार्कशीट और डिग्री के मामले कई साल से सामने आ रहे हैं। इस साल अप्रैल में हसनगंज पुलिस और ट्रांस गोमती की स्वाट टीम ने ऐसे गैंग का भंडाफोड़ किया था जो इससे जुड़ा हुआ था। इसमें विवि के परीक्षा विभाग से ही बर्खास्त एक बाबू भी पकड़ा गया। इस मामले में पुलिस तो कार्रवाई करती रही लेकिन विवि स्तर की कार्रवाई में तीन बाबुओं का विभाग बदला गया और जांच समिति बना दी गई। इसके बाद भी विश्वविद्यालय में ऐसी मार्कशीट पकड़ी गईं जिसमे अंकों में छेड़छाड़ की गई थी। फर्जी मार्कशीट बनाने में विवि की ही स्टेशनरी का इस्तेमाल करने की बात भी चर्चा में आई थी।


lucknow university


नंबर में छेड़छाड़ का मामला भी समिति बनाने तक
करीब 2 महीने पहले विश्वविद्यालय के फिजिकल एजुकेशन विभाग में छात्र-छात्राओं के इंटरनल के अंकों में छेड़छाड़ का मामला सामने आया। कई छात्र-छात्राओं के अंक पोर्टल पर बढ़ाये गए। विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. नीरज जैन ने मामले की शिकायत कुलपति से लेकर राजभवन तक की। लेकिन इस मामले में भी बस समिति बनाकर खानापूर्ति कर दी गई।


1 करोड़ से अधिक गायब 
ताजा मामला विश्वविद्यालय के खाते से 1 करोड़, 10 लाख रुपये उड़ाने का है। विश्वविद्यालय इसका ठीकरा बैंक पर फोड़कर खुद की खामियां छुपाने की कोशिश करता नजर आ रहा है। जबकि, इस मामले में विवि का लेखा विभाग भी कम लापरवाह नहीं है। जिन 11 चेक का इस्तेमाल कर विश्वविद्यालय के खाते से रकम उड़ाई गई उसमें से पहले 2 चेक अप्रैल 2018 में इस्तेमाल करके करीब 20 लाख रुपये उड़ाए गए थे। हर महीने विवि पास खातों का स्टेटमेंट आता है। इतनी बड़ी रकम गायब हुई लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। संभव है की फर्जीवाड़ा करने वालों में विवि से जुड़े लोग भी शामिल हों। लेकिन विवि प्रशासन ने इसमें जो समिति बनाई वो दोषी और लापरवाही की जांच करने की जगह सिर्फ विभाग के कामकाज की समीक्षा करेगी।



शिक्षक संघ ने 9 को बुलाई कार्यकारिणी बैठक
विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. नीरज जैन ने बताया की 9 अक्टूबर को शिक्षक संघ की कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है। उसमें विश्वविद्यालय के परीक्षा, वित्त और निर्माण विभाग से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों पर चर्चा होगी। डॉ. जैन के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन पूरा मामला इस लिए दबा रहा है क्योंकि सभी फर्जीवाड़ों में यहां के लोग भी शामिल हैं। अगर जांच हुई तो कई बड़े अधिकारी भी नप जायेंगे।