कानपुर में फर्जी असलहा लाइसेंस बनवाने का खुलासा, एक साल में बने 73 फर्जी लाइसेंस; मचा हड़कंप

कानपुर में फर्जी लाइसेंस बनाने का बड़ा खुलासा हुआ है। ये खुलासा खुद जिला प्रशासन ने किया है, जिसका दावा है कि यहां एक साल के अंदर 73 फर्जी लाइसेंस बनाए गए हैं। ये पूरा फर्जी खेल शस्त्र विभाग के कर्मचारियों द्वारा ही किया गया है। फर्जीवाड़े में मुख्य भूमिका शस्त्र विभाग के क्लर्क विनीत तिवारी की बताई जा रही है।

By: एबीपी गंगा | Updated: 21 Aug 2019 08:13 AM
fake arms licence scam busted in kanpur 73 fake licenses made in one year

कानपुर, एबीपी गंगा। अगर आप को अपना असलहा बनवाना है और आप बहुत प्रयास कर चुके हैं, फिर भी लाइसेंस नहीं बन पा रहा है, तो आप कानपुर में अपना लाइसेंस बनवा सकते है, क्योंकि यहां विभागीय अधिकारी आप का काम आसानी से कर देंगे। कानपुर में असलहा लाइसेंस में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। कानपुर के शस्त्र विभाग द्वारा एक साल के अंदर 73 फर्जी लाइसेंस जारी कर दिए गए, जिनका कोई रिकॉर्ड ही नहीं बनाया गया।



पूरा मामला खुलने के बाद जांच कर रहे सीडीओ अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि 11 जुलाई 2018 से लेकर इस साल जुलाई तक कानपुर में 73 ऐसे लाइसेंस बने हैं, जिनका किसी भी तरह का कोई मूल रिकॉर्ड नहीं  पाया गया है। विभागीय लोगों की मदद से ये लाइसेंस पुराने लाइसेंसों के नवीनीकरण के नाम पर फर्जी ढंग से बनाये गए है। इसमें मुख्य आरोपी क्लर्क विनीत पाया गया है, जिसने मामला खुलने पर पूछताछ से पहले ही जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की थी, जो अभी तक हॉस्पिटल में भर्ती है। उनके बयानों के बाद ही पूरा सत्य सामने आएगा।



वहीं, डीएम विजय विस्वास पंत का कहना है कि कानपुर में 2018 -19 में 431 लाइसेंस जारी किये थे, इसमें 180 लाइसेंसों का नवीनीकरण कराया गया। लाइसेंसों का फर्जीवाड़ा करने वालों ने इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर विभाग के बाबुओं से सेटिंग करके 73 फर्जी लाइसेंस जारी करवा दिए। साफ है कि इसके बदले में लाखों करोड़ों का भ्रष्टाचार किया गया होगा। उनका कहना है कि जांच के बाद इसमें जो भी अधिकारी दोषी होगा, उस पर निष्पक्षता से कार्रवाई की जायेगी। उन लाइसेंसों को भी निरस्त कराया जाएगा और एफआईआर भी कराई जायेगी।



कानपुर में फर्जी लाइसेंसों के इतने बड़े कारनामे से अधिकारियों की नींद उड़ गई है, लेकिन अधिकारियों का दावा भी अभी शक के घेरे में है कि इसमें सिर्फ एक लिपिक ही शामिल पाया जा रहा है, जबकि किसी में भी लाइसेंस को बनाने में पुलिस से लेकर कई विभागों की जांच रिपोर्ट्स लगाई जाती हैं। उनको चेक भी बड़े अधिकारी करते हैं, तो क्या उन अधिकारियों पर भी शिकंजा कस पाएगा, जिन्होंने इस पर आंखें बंद रखी।


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