अक्टूबर में होने जा रहे हैं ये 6 बड़े बदलाव, जानिए- आपकी जिंदगी पर इसका क्या पड़ेगा असर

अक्टूबर महीना उपभोक्ताओं की जिंदगी में कई बड़े बदलाव लेकर आ रहा है। ऐसे ही 6 बड़े बदलाव अक्टूबर में होने जा रहे हैं। इनका आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा इस रिपोर्ट में पढ़िए।

By: एबीपी गंगा | Updated: 11 Oct 2019 11:10 AM
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नई दिल्ली, एबीपी गंगा। अक्टूबर महीना उपभोक्ताओं की जिंदगी में कई बड़े बदलाव लेकर आ रहा है। सड़क और रसोई से लेकर बैंकिग सेवाओं तक में एक अक्टूबर, 2019 से कई तरह से बदलाव लागू होने जा रहे हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए खुशी की बात ये है कि ज्यादातर बदलावों का मकसद उपभोक्ताओं को बेहतर और सस्ती सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मकान और वाहन का लोन भी सस्ता हो रहा है, रसोई गैस में बदलाव होगा। ड्राइविंग लाइसेंस व गाड़ी के पंजीकरण के कलेवर भी बदल जाएंगे। यानी वो बदलाव जो सीधे तौर पर आम लोगों की जिंगसी से जुड़े हुए हैं। इस रिपोर्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं कि एक अक्टूबर से होने वाले 6 बड़े बदलाव और इनका आपकी जिंदगी पर कैसा असर पड़ेगा।



एक अक्टूबर से होने जा रहे हैं ये 6 बड़े बदलाव


होम और ऑटो लोन होगा सत्ता



रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट में कटौती की है। इसी का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए एसबीआई ने एक अक्टूबर से एसबीआई (SBI) ने अपनी ब्याज दरों को रेपो रेट से जोड़ने का अहम निर्णय लिया है। एसबीआई के इस कदम से ग्राहकों को होम और ऑटो लोन करीब 0.30 फीसदी तक सस्ती दरों से मिल सकेगा। एसबीआई के अलावा पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और निजी क्षेत्र के फेडरल बैंक ने एक अक्टूबर से खुदरा कर्ज की ब्याज दरों को रेपो से जोड़ने का फैसला किया है। बता दें कि अभी तक सभी बैंक मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट्स (MCLR)के आधार पर ब्याज दर से कर्ज देते थे। MCLR आरबीआई द्वारा तय की गई एक पद्धति है, जिसके आधार पर कॉमर्शियल बैंक्स ऋण ब्याज दर तय करती हैं।


मिनिमम बैंलेंस में बड़ी राहत


इसके अलावा एक अक्टबूर से एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यानी मिनिमम बैंलेंस में 80 फीसदी की बड़ी राहत मिलने जा रही है। एसबीआई ने मेट्रो शहरों में रहने वाले अपने ग्राहरों के लिए मंथली मिनिमम बैलेंस की रकम घटा दी है। अभी ये रकम 5,000 रुपये है, जिसे घटाकर 3,000 रुपये कर दिया जाएगा। इतना नहीं नहीं, अर्बन इलाकों के खाताधारकों को मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर कटने वाले चार्ज को भी कम कर दिया है। ऐसे मिनिमम बैलेंस वाले खाताधारकों के 75 फीसदी से कम रकम हुई तो 15 रुपये जीएसटी के साथ जुर्माना लगेगा। अभी तक 80 रुपये भी लगता था और जीएसटी अलग से। वहीं, अगर 50 से 75 फीसदी कम राशि हुई तो 12 रुपये और जीएसटी लगेगा। जो फिलहाल 60 रुपये जीएसटी के साथ लगता है।


DL-RC के भी बदलेंगे रंग


वहीं, एक अक्टूबर से पूरे देश में डीएल और आरसी का भी रंग बदलने जा रहा है। डीएल और गाड़ी के पंजीकरण प्रमाण पत्र का कलर, लुक, डिजाइन और सिक्योरिटी फीचर अब एक जैसे होंगे। डीएल और आरसी में अब माइक्रोचिप व क्यूआर कोड होंगे। जिसके चलते कोई भी अपना पिछला रिकॉर्ड छुपा नहीं सकेगा। वहीं, इन क्यूआर कोड को रीड करने के लिए ट्रैफिक पुलिस को हैंडी ट्रैकिंग डिवाइस उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही, अब से हर राज्य में न सिर्फ डीएल और आरसी का रंग एक जैसा होगा, बल्कि उनकी प्रिटिंग भी एक जैसी ही होगी। दोनों में जानकारियों भी एक जैसी होंगी और ये एक ही जगह पर दी जाएंगी। इन बदलावों के चलते सरकार अब से वाहनों और चालकों का ऑनलाइन डाटाबेस भी तैयार करेगी।


रसोई गैस के बदलेंगे दाम


एक अक्टूबर से आपकी रसोई गैस के दाम दाम भी बदल जाएंगे। दरअसल, एक सितंबर को बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस के दाम में 15.50 रुपये का इजाफा किया गया था। इन बढ़ी हुई कीमतों के बाद अब दिल्ली में 590 रुपये की कीमत का एक रसोई गैस सिलेंडर (14.2 किलो) हो गया है।


केंद्रीय कर्मियों के पेंशन नियमों में भी बदलाव


केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के पेंशन नियमों में सरकार द्वारा बदलाव किया गया है, जो एक अक्टूबर से लागू होंगे। मौजूदा नियमों के मुताबिक, अगर किसी केंद्रीय कर्मी की सेवा 7 साल पूरी होती है, तो उनकी मौत की स्थिति में परिवार को आखिरी वेतन के 50 फीसदी के बराबर पेंशन मिलेगी। उदाहरण के तौर पर, अगर उनका अंतिम वेतन 30 हजार है, तो परिवार को पेंशन 15 हजार मिलती है। अब बदलाव के नियमों के मुताबिक, अगर केंद्रीय कर्मी को लगातार सेवा किए 7 साल पूरी नहीं भी होते हैं, तब भी परिवार को पेंशन का लाभ मिलेगा।


जीएसटी रिटर्न का नया फॉर्म होगा लागू



एक अक्टूबर से जीएसटी रिटर्न का नया फॉर्म भी लागू हो जाएगा। 5 करोड़ सालाना से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों को जीएसटी रिटर्न का फॉर्म 1 भरना होगा है, इसी फॉर्म 1 में बदलाव किए गए हैं। इस आय वाले कारोबारियों को नए बदलाव के बाद अनिवार्य रूप से जीएसटी एएनएक्स-1 फॉर्म भरना होगा। यानी जीएसटीआर-1 की जगह जीएसटी एएनएक्स-1 फॉर्म से लेगा। वहीं, इस फॉर्म को छोटे कारोबारियों के लिए जनवरी 2020 से अनिवार्य किया जाएगा।


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