बाइक बोट घोटाला: संजय भाटी के घर पुलिस की छापेमारी, 100 बाइक व कई अधजले दस्तावेज बरामद

मेरठ में बाइक बोट स्कीम के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी कार्रवाई की थी। पुलिस ने अरबों की ठगी को अंजाम देने वाले संजय भाटी के करीबी अमित कसाना को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने संजय भाटी के साथी अमित कसाना को गिरफ्तार कर लिया था।

By: एबीपी गंगा | Updated: 15 Jun 2019 11:51 PM
Police raid on Sanjay bhati house in bike boat scam
ग्रेटर नोएडा, एबीपी गंगा।  ग्रेटर नोएडा में बाइक बोट के मालिक संजय भाटी के घर और दफ्तर पर गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने छापेमारी कर 100 बाइक बरामद की हैं। ये कार्रवाई एसआईटी की टीम ने की। साथ ही इस दौरान बैंक चेक से भरे पांच बड़े बैग भी मिले हैं। ''बाइक बोट'' घोटाले में पुलिस कस्टडी में लिये गये संजय भाटी से पूछताछ के बाद पुलिस ने इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने जानकारी दी है कि जांच से बचने के लिये संजय ने अपने दफ्तर को जानबूझकर आग लगाई थी। अधिकारियों के मुताबिक आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

बाइक बोट के जरिये की थी लाखों की ठगी

मेरठ में बाइक बोट स्कीम के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी कार्रवाई की थी। पुलिस ने अरबों की ठगी को अंजाम देने वाले संजय भाटी के करीबी अमित कसाना को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने संजय भाटी के साथी अमित कसाना को गिरफ्तार कर लिया था। दादरी पुलिस ने मेरठ से ये गिरफ्तारी की थी। कसाना कंपनी का फ्रेंचाइजी मैनेजर बताया जा रहा है। दोनों ठग कई दिनों से फरार चल रहे थे। वहीं, भाटी ने खुद सरेंडर कर दिया था।

क्या था ये घोटाला

बता दें कि बाइक बोट कंपनी के खिलाफ दादरी कोतवाली में 33 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। इनका जाल देश के कई हिस्सों में फैला था। बाइक बोट स्कीम में हर महीने निवेशकों को मोटी कमाई का लालच दिया जाता था। इस स्कीम की शुरुआत करीब डेढ़ साल पहले हुई थी। इस स्कीम में बाइक टैक्सी लगवाने पर हर महीने मोटी रकम का लालच दिया जाता था। इसके लिए प्रति व्यक्ति से एक बाइक लगवाने के नाम पर 62,100 रुपये लिये जाते थे और बदले में 12 महीनों तक हर महीने 9765 रुपये उसके खाते में डाले जाते थे। इतना ही नहीं, इस रकम को साल भर में दोगुना करने का लालच भी दिया जाता था। स्कीम के लालच में आकर हजारों लोगों ने इसमें निवेश किया, लेकिन करीब तीन महीने से निवेशकों को उनकी रकम नहीं मिली।