सिल्क स्मिता हो या तुम्हारी सुलु...विद्या बालन ने ये साबित कर दिखाया- फिल्में हीरो के नाम से नहीं चलती

विद्या बालन फिल्म इंडस्ट्री की वो अभिनेत्री हैं, जिन्हें बहनजी से लेकर मनहूस तक न जानें क्या-कुछ नहीं कहा गया। लेकिन अपने दमदार रोल और एक्टिंग से विद्या बालन ने ये साबित कर दिखाया कि फिल्मे हीरो के नाम या चेहरे से नहीं चलती हैं। एबीपी गंगा की She Heroes की सीरीज में आज देखिए विद्या ने कैसे बदली बॉलीवुड की मानसिकता।

By: एबीपी गंगा | Updated: 12 Aug 2019 02:09 PM
Vidya Balan she the hero who changed film industry male bastion mentality through her role choices

नई दिल्ली, एबीपी गंगा। बॉलीवुड का नजरिया अब फिमेल एक्टर्स की तरफ बदल रहा है या यूं कहें कि बॉलीवुड 'पिंक रिवोल्यूशन' की तरफ बढ़ रहा है। जहां अब फिमेल स्टार्स सिर्फ किसी मेल स्टार्स की सपोर्टिंग एक्ट्रेस नहीं रह गई है, बल्कि वे अपने दम पर अपने दमदार किरदार से लोगों का दिल जीत रही हैं। पर्दे पर वो ये साबित कर रही हैं कि कोई भी फिल्म बिना किसी मेल एक्टर के भी हिट हो सकती है। ऐसी फिल्मों का बेस्ट एग्जांपल विद्या बालन ने सेट किया है। कैसे 'हम पांच' की उस लड़की ने छोटे पर्दे से सफर तय कर बड़े पर्दे पर न सिर्फ अपनी अलग एक पहचान बनाई, बल्कि कई ऐसे किरदार भी निभाए, जिन्होंने लोगों को प्रेरित भी किया है।



हिंदी फिल्म इंडस्ट्री पर हमेशा मेल यानी पुरुषों का दबदबा रहा है। चाहें वो कपूर खानदान से लेकर तीनों खान की बात हो या फिर खिलाड़ी की बात क्यों न हो? यहां तक की ये भी कहा जा रहा है कि जिसने तीनों खान के साथ काम न किया हो, मतलब उसके करियर की सफलता अभी अधूरी है। हालांकि, इस मिथ को आज की दौर की हिरोइन अपनी काबिलियत और मूवी के किरदार के सलेक्शन से तोड़ रही हैं।


हमेशा ही, हमारी फिल्मों में मेल स्टार लीड में रहा है, जिसे ज्यादा स्क्रीन टाइम, ज्यादा डायलॉग और यहां तक ठंड में कोट पहने का भी ऑपशन मिला है। जबकि हिरोइन लीड में होने के बावजूद एक सपोर्टिंग रोल की तरह पर्दे पर दर्शायी गई है। जहां ठंड में उसे शिफॉन की साड़ी में दिखाया गया, भले ही वो अंदर से कितना भी ठुठुर क्यों न रही हो। इतना ही नहीं, काम बराबर, मेहनत बराबर, लेकिन जहां पैसों की बात आती है, उनकी फीस भी मेल एक्टर्स के मुकाबले कम होती थी। लेकिन धीरे-धीरे हिरोइन की तरफ लोगों के नजरिये में बदलाव देखा जा रहा है। अब हिरोइन को बड़े और बेहतर रोल ऑफर हो रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्हें भी मेल एक्टर के मुकाबले अपने काम का बेहतर पेमेंट मिल रहा है। अब फिमेल प्रोड्यूसर, डायरेक्टर भी हैं, जिन्होंने अपने खुद को साबित किया है। इसी का नतीजा कहा जा सकता है कि इंडस्ट्री में काम करने का बेहतर विकल्प बना है, जिसमें Pay parity यानी हीरो के बराबर हिरोइन को मेहनताना मिलने की संभावना भी बढ़ गई हैं। जिसकी शिकायत कई बार इंडस्ट्री में उठी भी है।



विद्या बालन उन हिरोइनों में से एक हैं, जिन्होंने अपने किरदार के सलेक्शन से पुरुष प्रधान मानी जाने वाली फिल्म इंडस्ट्री के नियमों को बदलकर रख दिया है। इस रूल को तोड़ने वाली विद्या को अगर गेम चेंजर कहा जाए, तो कोई ताज्जुब की बात नहीं होगी। विद्या ने पा, इश्किया, नो वन किल्ड जेसिका, द डर्टी पिक्चर, कहानी जैसी फिल्मों में अपने किरदार से ये साबित कर दिखाया कि किसी फिल्म को हिट होने के लिए किसी मेल एक्टर की जरूरत नहीं होती।



2009 में रिलीज हुई फिल्म 'पा' के लिए विद्या को स्टार स्क्रीन अवार्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार भी मिला। इस फिल्म को देखने के बाद कई माओं ने ये कहा था कि वे विद्या जैसी मां बनना चाहती हैं। इस फिल्म में विद्या के बेटे का किरदार अमिताभ बच्चन ने निभाया था, जिसे प्रोजेरिया नाम की बीमारी हो जाती है। इसमें अमिताभ को 13 साल का बच्चा दिखाया गया था, जिसका नाम औरो था। फिल्म को लोगों ने खूब पसंद किया था।



साल 2010 में ब्लैक कॉमेडी फिल्म 'इश्किया' को भी दर्शकों का खूब प्यार मिला। विद्या ने 'पा' में जहां एक आदर्श का मां का किरदार निभाया, वहीं इश्किया में उनका बिल्कुल अलग अंदाज देखने को मिला। उन्हें इस अवतार में देखकर दर्शक भी हैरान रह गए। विशाल भारद्वाज की इस फिल्म को करके विद्या ने खुशी भी जाहिर की थी और कहा था कि मुझे खुशी है कि मैं ऐसा किरदार निभाने को मिला, जहां एक महिला सांठगांठ भी करती है और चतुर भी है।



इसके बाद विद्या ने साल 2011 में रिलीज हुई फिल्म 'नो वन किल्ड जेसिका' के अपने किरदार और अपने दमदार अभिनय से ये एक बार फिर साबित करने का काम किया, कि फिल्मों हिरो के नाम पर नहीं कलाकारों के काम पर चलती हैं। सच्ची घटना पर आधारित इस फिल्म में कोई भी हिरो नहीं था। इस लीड रोल में विद्या के साथ रानी मुखर्जी नजर आई थीं। फिल्म समीक्षकों ने भी फिल्म को बेहतरीन सेटिंग दी। इस फिल्म में जहां रानी का किरदार मुखर था, वहीं विद्या का खामोश। इन दोनों के कॉम्बिनेशन को दर्शकों ने खूब सराहा।



इसी साल यानी 2011 में रिलीज हुई सिल्क स्मिता की बायोपिक 'द डर्टी पिक्चर' में विद्या के किरदार को कोई भूला नहीं सकता। फिल्म का वो डायलॉग Entertainment, Entertainment और Entertainment आज भी सुपरहिट है। इस फिल्म में सिल्क के किरदार से एक बार फिर विद्या ने सभी को चौंका कर रख दिया। ये बात खुद विद्या ने कबूली कि इस फिल्म ने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी है। जिस दौर में हिरोइन ने साइज जीरो को पकड़ रखा था, उस दौर में विद्या ने सुडौल फिगर से इस लुक के चलन को तोड़ कर रख दिया। इस फिल्म में उन्होंने अडल्ट फिल्म स्टार सिल्क स्मिता का रोल प्ले किया था।



थ्रिलर फिल्म 'कहानी' विद्या की वो दमदार फिल्म रही है, जिसमें उनके विद्या बागची के किरदार की आज भी तारीफ होती है। इसी तरह 'बेगम जान', 'भूलभलैया', 'तुम्हारी सुलु' में भी जबरदस्त अभिनय किया और हर बार ये साबित किया कि वो जमाना गया, जब फिमेल एक्टर्स पर्दे पर सिर्फ मेल एक्टर्स की सपोर्टिंग कास्ट की तरह इस्तेमाल होती थीं।


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