हमें समलैंगिक अधिकारों पर फिल्में बनानी चाहिए: आयुष्मान खुराना

आयुष्मान अपनी आने वाली चार फिल्मों को पर्दे पर लाने की तैयारी में जुटे हुए हैं। जिसमें 'ड्रीम गर्ल', 'बाला', 'गुलाबो सिताबो' और 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' शामिल हैं।

By: कोमल गौतम | Updated: 22 Jul 2019 08:09 PM
Ayushman Khurana Feels Give importance to commercial films

बॉलीवुड के मिस्टर डोनर आयुष्मान खुराना  'विक्की डोनर' में एक शुक्राणु दाता से लेकर 'शुभ मंगल सावधान' में गुप्त रोग से पीड़ित और हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'अंधाधुन' में एक अंधे किरदार की भूमिका निभा कर ये साबित कर दिया की वो हर किरदार को सच्चे मन से बड़े पर्दे पर उतारते है। ये ही नहीं फिल्म 'आर्टिकल 15' में एक आदर्श पुलिस अफसर के किरदार निभाकर आयुष्मान खुराना ने एक अभिनेता के तौर पर अपनी प्रतिभा व सीमाओं को साबित किया है।


उनका मानना है की वो अपने आप को एक अलग स्तर पर ले जाना चाहते है। आयुष्मान खुराना अपनी आने वाली फिल्मों को लेकर काफी बिजी है। आयुष्मान अपनी आने वाली चार फिल्मों को पर्दे पर लाने की तैयारी में जुटे हुए हैं। जिसमें 'ड्रीम गर्ल', 'बाला', 'गुलाबो सिताबो' और 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' शामिल हैं।


आयुष्मान खुराना  पूरी तरह से 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' में एक समलैंगिक पुरुष की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। उनका मानना ​​है कि समलैंगिक अधिकारों पर आधारित जैसी फिल्में बनाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया, "मुख्यधारा की व्यावसायिक फिल्मों में 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' काफी महत्वपूर्ण हैं। व्यावसायिक क्षेत्रों में समलैंगिक अधिकारों पर आधारिक फिल्में बनाना महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस तरह आप परिवर्तित होने का प्रचार नहीं कर रहे हैं।" उन्हें फिल्म देखने और यह महसूस करने की जरूरत है कि समलैंगिक लोगों को उनके अधिकार देना कितना महत्वपूर्ण है। ”


फिल्म बाला में वो बाल बांधने वाले व्यक्ति की भूमिका निभाते हुए दिखाई देंगे। उनका कहना है कि बाला 30 साल की उम्र के बाद 50 प्रतिशत पुरुषों के साथ इस मुद्दे पर प्रकाश डालती हैं। एक और मुद्दा उनकी फिल्म स्पर्म डोनेशन, बॉडी शेमिंग और गर्भवती माता-पिता की उम्र बढ़ने जैसे मुद्दों से निपटने के बाद होगी। वह कहते हैं कि उन्हें खुशी है कि उन्होंने बालिंग मुद्दे से निपट लिया।


आयुष्मान ने खुद को खोजने और एक नया बेंचमार्क स्थापित करने में मदद करने के लिए अपनी फिल्मों को श्रेय दिया। वो स्वीकार करते हैं कि इससे उन्हें अपने अंतर्ज्ञान के साथ जाने की अधिक हिम्मत मिलती है और वे अब एक खुशहाल जगह पर हैं।