अतीत से: नेताजी साइकिल से चलते थे और पीछे दौड़ लगाते थे गनर

एबीपी गंगा की खास सीरीज चुनावी यादें में अतीत से जुड़ा ये किस्सा 70 के दशक के चुनाव के दौरान का है, जब उस दौर के दिग्गज नेता रहे बाबू तेजबहादुर गंगवार साइकिल पर प्रचार करते थे और पीछे-पीछे उनके गनर दौड़ लगाते थे।

By: एबीपी गंगा | Updated: 15 May 2019 06:11 PM
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नई दिल्ली, एबीपी गंगा। लोकसभा चुनाव के दौरान एबीपी गंगा की खास सीरीज चुनावी यादों में आज हम आपको अतीत से जुड़ा एक ऐसा किस्सा बताने जा रहे हैं, जब नेताजी साइकिल से चलले थे और पीछे दौड़ लगाते थे उनके गनर।


राजनीतिक दलों को आज के दौर में संसाधनों की कमी से जूझना नहीं पड़ता है, लेकिन 70 के दशक के चुनाव के दौरान संसाधनों का अभाव रहता था। यहां तक की प्रचार के साधन भी सीमित हुआ करते थे। उस दौर के दिग्गज नेता रहे बाबू तेजबहादुर गंगवार ने जब अपना पहला विधानसभा चुनाव (बीसलपुर, पीलीभीत) लड़ा था, तो उनके पास कोई जीप (वाहन) भी नहीं थी। तब उन्होंने बिना किसी संकोच के चुनाव प्रचार के लिए साइकिल का सहारा लिया था। वो रोजाना कई किलोमीटर साइकिल चलाकर वोट मांगने निकलते थे। उनकी ये मेहनत रंग लाई और नतीजा ये हुआ कि पहली बार में ही वे विधानसभा पहुंच गए।


ये किस्सा 1969 का है, जब चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल ने बाबू तेजबहादुर गंगवार पर विश्वास जताते हुए उन्हें विधानसभा का टिकट दिया। गंगवार जमीनी नेता थे, जिन्होंने गांव की राजनीति से शुरुआत की। पहले सरपंच बने, जब बिलसंडा विकास खंड का गठन हुआ, तो पहले ब्लॉक प्रमुख चुने गए। ऐसे में चौधरी चरण सिंह ने उनपर विश्वास किया, लेकिन जब बात चुनाव प्रचार की आई तो यह समस्या सामने आन पड़ी कि उनके पास कोई वाहन नहीं है। इसके बावजूद गंगवार बिल्कुल हताश नहीं हुए और साइकिल से चुनाव प्रचार करने का निर्णय लिया। ये किस्सा भी चुनावी यादों में दर्ज है, जब गंगवार आगे-आगे साइकिल पर चलते थे, तो पीछे-पीछे उनके गनर दौड़ लगाते थे।