पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए आयोग ने की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश

उत्तराखंड ग्राम विकास एवं पलायन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पहाड़ों से पलायन रोकने के सुझाव दिए हैं।

By: मनीष नेगी | Updated: 06 Sep 2019 03:32 PM
uttarakhand village development and migration commission has submitted report to chief minister

देहरादून, एजेंसी। उत्तराखंड ग्राम विकास एवं पलायन आयोग ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिश की है जिससे प्रदेश के पर्वतीय स्थानों से हो रहे पलायन को कम किया जा सके। यह रिपोर्ट आयोग ने राज्य में ग्राम विकास के क्षेत्र में योजनाओं का विश्लेषण करने के बाद तैयार की है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने को एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि पलायन आयोग के सुझावों पर प्रभावी पहल की जायेगी।


इस संबंध में पलायन आयोग के अब तक के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के गांवों और खेती को आबाद करने के लिए व्यापक जन जागरुकता जरूरी है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए न्याय पंचायत स्तर पर कृषि विकास से संबंधित विभागों के अधिकारियों की टीम बनाये जाने की भी जरूरत बतायी। यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार आयोग के उपाध्यक्ष एस. एस. नेगी ने प्रदेश में महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय सृजित करने हेतु उनके लिए समान अवसर और भागीदारी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है। सुझावों में महिलाओं के कौशल विकास को प्राथमिकता देने की बात भी कही गयी है।


नेगी ने बताया कि फसलों को बंदर और जंगली सूअरों जैसे जानवरों से बचाने के लिये कुछ ब्लॉक में सुरक्षा दीवारें बनाई जा रही हैं । उन्होंने कहा कि सभी जिलों में ऐसा किया जाना आवश्यक है। इसके अलावा, बंदरों से फसलों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की सहायता से एक योजना बनायी जानी चाहिए। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की कमी को भी एक बड़ी समस्या बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे निपटने के लिए योजना के कार्यों का संयोजन किया जा सकता है।


रिपोर्ट में उत्तराखंड में औषधीय और सुगंधित पौधों की अच्छी क्षमता को देखते हुए इसे एक लाभकारी गतिविधि के रूप में विकसित करने और महत्वपूर्ण आजीविका उत्पादन गतिविधि में बदलने के प्रयास की जरूरत बतायी गयी है ।


आयोग ने स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की गुणवत्ता निगरानी और प्रमाणन का भी सुझाव दिया है जिससे उनका मानकीकरण हो और उनके लिये सार्वभौमिक बाजार खुले । उत्पादों के विपणन और खुदरा के लिए गतिशील आनलाइन प्लेटफार्म विकसित करने की भी जरूरत पर बल दिया गया है ।


इसके अलावा, पर्वतीय क्षेत्रों में सामूहिक रूप से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का भी सुझाव दिया गया है। संस्करण केन्द्रों, पैकेजिंग और नर्सरी विकास के लिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की क्षमता रखने वाले कौशल प्रदान किए जाने का सुझाव दिया गया है।


आयोग ने बताया कि पर्वतीय जिलों में ग्राम विकास अधिकारी के रिक्त पदों की संख्या मैदानी जिलों की तुलना में अधिक हैं। उसने इन पदों पर जल्द नियुक्ति किए जाने की सिफारिश की है ।