ब्लॉग: आखिर क्यों नाराज हैं शबाना आजमी

एबीपी गंगा | 09 Jul 2019 07:54 PM

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छिपा रहे हो। ये महज इत्तेफाक था कि कैफी आजमी साहब की ये नज़्म गाने के तौर पर उन्हीं की बेटी शबाना आजमी पर फिल्माई गई.और अब जब शबाना आजमी ने अपने एक बयान से भूचाल ला दिया है तो फिर कैफी आजमी साहब की लाइनों के जरिये ही पूछना पड़ रहा है कि जिन जख्मों को वक्त भर चला है, तुम क्यूं उन्हें छेड़े जा रहे हो।


दरअसल शबाना ने कहा है कि सरकार की आलोचना करना राष्ट्रद्रोह मान लिया जाता है। ये शबाना के जाती ख्यालात हैं। लेकिन इन ख्यालों के दायरे में पूरा देश आता है इसलिए उन पर सियासी हमले शुरू हो गए और एक पुरानी बहस नए सिरे से शुरू हो गई। भाजपा ने इसे टुकड़े-टुकड़े और अवॉर्ड वापसी गैंग से जोड़ते हुए हमला बोला है। वैसे शबाना आजमी जैसी सोच और उस पर बहस मोदी सरकार के साथ साल 2014 से ही शुरू हो चुकी है कथित धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी सोच के लोग समाज की कुछ घटनाओं को सीधे सरकार की सरपरस्ती बताकर हमलावर होते हैं और जवाब में दूसरा पक्ष ऐसे लोगों पर जुबानी हमले शुरू करता है। सोशल मीडिया के इस दौर में विचारधारा की ऐसी जंग तेजी से वायरल भी होती है। लेकिन शबाना आजमी ऐसी संजीदा कलाकार ने ये बात सोशल मीडिया के किसी प्लेटफार्म से नहीं बल्कि एक कार्यक्रम के मंच से सीधे-सीधे कही है लिहाजा इसकी संजीगदी और बढ़ जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि

क्या शबाना आजमी का बयान देश की सच्चाई है या सिर्फ उनकी विरोधी सोच है?
क्या वाकई में मोदी सरकार अपनी आलोचना को राष्ट्रदोह मानती है?
क्या एकबार फिर ‘अवॉर्ड वापसी’ गैंग की वापसी हो रही है ?


और शबानी आजमी के इस बोल पर सियासी जंग छिड़ गई। सियासी जंग ही क्यों उनकी अपनी फिल्म इंडस्ट्री से भी शबाना के इन बोलों के खिलाफ वीडियो वॉर छिड़ी हुई है। पहली प्रतिक्रिया एक नामालूम सी एक्ट्रेस पायल रोहतगी की ओर से आई है। कट्टर हिंदूवादी छवि दिखाकर फिल्म इंडस्ट्री में वजूद की जंग लड़ने वाली कुछ सी ग्रेड फिल्मों की हीरोइन पायल ने शबाना आज़मी के मजहब को लेकर ज्यादा हमले किए।


शबाना के बयान पर सबसे पहला सियासी वार भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने किया। जिन्होंने कहा कि अवॉर्ड वापसी गैंग आ चुका है।


इसके फौरन बाद बड़ा हमला भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने किया, जिन्होंने कहा कि टुकड़े टुकड़े गैंग का नया नेता आ गया है।


शबाना का बयान सियासत के दायरे में आएगा इस बात का इल्म उन्हें भी बखूबी रहा होगा, क्योंकि ये पहला मौका नहीं है जब कोई बॉलीवुड कलाकार सियासी दायरों में आया हो। इसके पहले भी कठुआ गैंगरेप, अखलाक मर्डर केस और असहिष्णुता पर बहस जैसे कई मामले रहे। जब बॉलीवुड के कलाकारों ने खुल कर इस मुद्दों पर अपनी राय रखी। हालांकि ये बात सही है कि ज्यादातर मामलों में बॉलीवुड कलाकारों की राय विवादों में रही क्योंकि सुविधाजनक रूप से चुने गए इन मुद्दों पर कलाकार खुद ही घिरते चले गए फिर चाहे वो आमिर खान हों या शाहरुख खान।


वैसे सितारों के बयानों और विवादों की बड़ी वजह फिल्म का प्रमोशन या पब्लिसिटी स्टंट भी माना जाता रहा क्योंकि ये ऐसे मुद्दे लंबे समय से देश के सामने आते रहे हैं फिर चाहे वो 84 के दंगे हों, भागलपुर का अंखफोड़वा कांड हो...या हाशिमपुरा के दंगे...बॉलीवुड कलाकारों की दिलचस्पी न के बराबर या फिर इन मसलों को लेकर सियासत छोड़ दें। समाज के दूसरे तबकों ने प्रतिक्रिया जताने से परहेज ही किया


सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बाद ये चीजें पहले से ज्यादा खुल कर सामने आने लगी है। लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं तो वो हाथोंहाथ पहुंच रही हैं। जिसका नतीजा है कई लोग ट्रोल भी हो जाते हैं, तो इन पर सियासत भी भड़क जाती है। शबाना आजमी की पहचान हमेशा ही संजीदा अदाकारा के तौर पर रही है। राज्यसभा में भी वो रह चुकी हैं। ऐसे में उनके इस बयान का असर होना ही था।


कई बार समाज में कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं, जो संवेदनशील लोगों को झकझोर देती हैं और उनके तल्ख बयान सामने आते हैं। ऐसी घटनाओं से सरकार का सीधा कोई लेना-देना तो नहीं होता, लेकिन ऐसी घटनाओं का बढ़ना जरूर सरकार को कठघरे में खड़ा करता है। जो सरकार की सोच से अलग सोच रखते हैं वो भी उतने ही हिंदुस्तानी है, जितने की दूसरे लोग। ऐसे में जरूरत सिर्फ उन हालातों पर फौरन काबू पाने की है, जो देश में किसी भी तरह की खाई पैदा करते हैं। सरकार को दो बातें हमेशा ध्यान रखनी चाहिए। पहली बात कि कोई भी सवाल बेसबब नहीं होता और दूसरी बात कि लोकतंत्र में हर तरह के विचारों को पूरा सम्मान मिलना चाहिए। ध्यान सवाल उठाने वालों को भी रखना होगा। विरोध करते हुए देश के सम्मान का दायरा नहीं टूटे और सबसे अहम है वक्त, जबकि मुद्दे उठाए जाते हैं।