राम मंदिर पर शिवसेना की सियासत के क्या हैं मायने ?

एबीपी गंगा | 06 Jun 2019 05:39 PM

अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर को लेकर एक ओर जनभावनाएं जोर मारती रहती हैं तो दूसरी ओर सियासत भी दांव चलती रहती है, प्रचंड बहुमत से बनी पीएम मोदी की दूसरी सरकार ने भावनाओं और सियासत दोनों को नई परवाज दे दी है। मुख्यमंत्री योगी कुछ घंटे बाद अयोध्या पहुंचने वाले हैं तो महाराष्ट्र से हिंदुत्व का झंडा उठाए शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे अगले हफ्ते अपने सियासी कुनबे के साथ राम की नगरी पहुंचने वाले हैं। इस बीच सामना में गृहमंत्री अमित शाह की जमकर तारीफ भी हुई है जबकि तीन दिन पहले ही सामना में पीएम मोदी पर निशाना साधा गया था। इन सारे घटनाक्रम के बाद आपके मन में जो सवाल उठ रहे होंगे कि


राम मंदिर पर शिवसेना की सियासत के क्या मायने हैं?
क्या अमित शाह की तारीफ शिवसेना के दबाव की रणनीति है?
योगी के अयोध्या दौरे ने राम मंदिर पर सियासत बढ़ा दी है ?


प्रधानमंत्री मोदी को प्रचंड बहुमत मिला तो अयोध्या में राम मंदिर को लेकर सरगर्मियां फिर तेज़ हैं। इस बार हिंदू वोटबैंक को लेकर मची होड़ की एक नई तस्वीर दिखती नज़र आ रही है। भाजपा ने 303 सीटों के जबरदस्त बहुमत से साबित कर दिया कि जात-पात से ऊपर उठकर लोगों ने वोट दिया। माना जा रहा है कि पीएम मोदी का जादू इस बार मुस्लिमों पर भी खूब चला है। ऐसे में चुनाव जीतते ही मोदी ने सबका विश्वास नारा बुलंद किया तो हिंदू वोटबैंक की एक और अलंबरदार शिवसेना हरकत में आ गई। तीन दिन पहले मुखपत्र सामना में बेरोजगारी के मुद्दे पर पीएम मोदी पर निशाना साधने वाली शिवसेना ने आज गृहमंत्री अमित शाह की तारीफ में कसीदे पढ़े।


माना जा रहा है कि अमित शाह की तारीफ के पीछे शिवसेना दबाव की रणनीति अपना रही है। केंद्र में पहली बार गृहमंत्री बने और सरकार में नंबर-2 अमित शाह के सामने कश्मीर और राम मंदिर दो अहम मुद्दे हैं और दोनों ही हिंदुत्व से जुड़े हैं। शिवसेना गृहमंत्री की तारीफ के बहाने दबाव बनाकर खुद को हिंदुत्व की बड़ी हितैषी साबित करने की फिराक में है। इतना ही नहीं उद्धव ठाकरे 15 जून को अपने सभी सांसदों को लेकर रामलला के दर्शन करने अयोध्या भी पहुंचने वाले हैं। सात-आठ महीने पहले भी उद्धव अयोध्या जा चुके हैं।


उद्धव के पिता और शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे 27 साल पहले रामजन्मभूमि आंदोलन से ही देशभर में हिंदुत्व का सबसे बड़े पोस्टर ब्वॉय बन बैठे थे। अब एक साल के भीतर उद्धव के दूसरी बार अयोध्या जाने को भी शिवसेना के प्रखर हिंदुत्व की लकीर पर दोबारा लौटने की कोशिश माना जा रहा है। शायद इसीलिए उद्धव पीएम मोदी के वाराणसी में नामांकन के दौरान भी मौजूद थे। वैसे दिलचस्प ये भी है कि उद्धव के दौरे से पहले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को ही अयोध्या पहुंच रहे हैं। योगी यूपी की सत्ता संभालने के बाद कई बार अयोध्या जा चुके हैं, लेकिन प्रचंड बहुमत वाली मोदी सरकार-टू के बाद योगी का अयोध्या पहुंचना सियासत की नई उम्मीदों को हवा दे रहा है।


योगी तो अपने एजेंडे पर ही आगे बढ़ते नज़र आ रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उद्धव ठाकरे भाजपा से भी एक कदम आगे बढ़ जाना चाहते हैं। इसके पीछे क्या सिर्फ महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव की सियासत है या फिर राष्ट्रीय फलक पर हिंदुत्व के झंडाबरदार बनने की सियासत।