जनसंख्या नियंत्रणः देश की सबसे बड़ी मुसीबत पर भी हो रही मजहबी सियासत

एबीपी गंगा | 20 Jun 2019 07:05 PM
बजट से पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने अभिभाषण में देश की जनता के सामने मोदी सरकार का एजेंडा पेश कर दिया। जिसमें मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान कई मोर्चों पर हुए काम का ब्यौरा था और सरकार के दूसरे कार्यकाल में देश के सामने खड़ी चुनौतियों का जिक्र भी था। जिसमें रोजगार, गरीबी, पानी, स्वास्थ्य समेत कई अहम मुद्दे शामिल हैं लेकिन विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका भारत अब अपने ही बोझ तले दबने की ओर बढ़ने लगा है। सवा अरब के आंकड़े को पार कर चुका आबादी का आंकड़ा अपने साथ बेरोजगारी, भूख और गरीबी की खाई को भी बढ़ाता जा रहा है। देश के सामने खड़ी ये सबसे बड़ी मुसीबत भी राजनीति के लिए एक मुद्दा बनती दिख रही है। आबादी क्यों बढ़ रही है, इसे कैसे रोका जाए इसपर बहस की बजाय बात इसपर इसपर उलझने लगी है कि जनसंख्या कौन बढ़ा रहा है।

इस गंभीर मुद्दे पर कानून बनाने की बात पर मजहबी दंगल छिड़ गया है। मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी सांसद एसटी हसन ने इस मुद्दे को ये कहते हुए नया मोड़ दे दिया कि देश की आबादी मुसलमान नहीं बल्कि पिछड़ी जातियों और एससी-एसटी वर्ग की वजह से बढ़ रही है।

इस वक्त देश में मुसलमानों की आबादी करीब 20 करोड़ है, जबकि हिंदू आबादी करीब 96 करोड़ है। ऐसे में सपा सांसद का कहना है कि आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी ज्यादा है लेकिन इसका ठीकरा सिर्फ मुसलमानों के सिर फोड़कर इस मुद्दे को सियासी शक्ल देने की कोशिश की जा रही है।

दरअसल, लोकसभा चुनावों से ही जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून का मुद्दा गरमाया हुआ है और राजनीति के गलियारों में भी अब इस मुद्दे पर मंथन की बात होने लगी है। पिछली सरकार में इस मुद्दे पर प्राइवेट मेंबर बिल लाने वाले संजीव बाल्याण अब मंत्री बनने के बाद फिर जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने की वकालत कर रहे हैं।

संजीव बाल्याण के बयान से अब ये कयास लगाए जाने लगे हैं कि बढ़ती आबादी के खतरे को भांपते हुए मोदी सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की ओर कदम बढ़ा सकती है। लेकिन कानून बनाने से पहले इस मुद्दे पर देश में आम राय बनाना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

बढ़ती जनसंख्या इस वक्त देश की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है, लेकिन समाज इस गंभीर चुनौती को लेकर आंखे मूंदे हुए है, जबकि पार्टियां इस मामले पर अपनी सुविधा की राजनीति करती रही हैं, जबकि बढ़ती आबादी के साथ बढ़ती जा रही बेरोजगारी और गरीबी हर धर्म और जाति के लिए समस्या है, ऐसे में अब हर वर्ग को परिवार नियोजन पर विचार करना जरूरी हो चुका है, साथ ही सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के लिए एक ठोस कदम उठाने का समय भी आ चुका है।