शिकंजे में पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम...आखिर क्या होगा

सचिन बाजपेयी | 21 Aug 2019 09:46 PM

2010 का दौर याद करिए, जब पी चिदंबरम देश के गृह मंत्री थे....तब अमित शाह को सीबीआई शोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में जेल में थे...और ठीक 9 साल बाद 2019 में अमित शाह देश के गृहमंत्री हैं...और चिदंबरम को सीबीआई ढूंढ रही है...उस दौर में बीजेपी ने कांग्रेस के खिलाफ हल्ला बोल दिया था...लेकिन आज कांग्रेस चाह के भी ऐसा नहीं कर सकती...क्योंकि वो संख्या के मुकाबले में तब की बीजेपी के बराबर आज भी नहीं है...दरअसल चिदंबरम को गिरफ्तार करने के लिए दोनों एजेंसिया लगातार हाथ पैर मार रही है...आईएएनएक्स मीडिया समूह से जुड़े इस मामले में चिदंबरम पर आरोप है अपने पद पर रहते हुए अधिकारों के दुरुपयोग का...और भ्रष्टाचार का...सिर्फ चिदंबरम ही नहीं..भ्रष्टाचार के आरोप में तो उनका पूरा परिवार फंसा हुआ है...बेटा कार्ती भी इसी केस में आरोपी है...तो वहीं बेटी पर भी इसमें फायदा लेने का आरोप है...पत्नी नलिनी चिदंबरम सारदा चिटफंड केस का सामना पहले ही कर रही हैं...उन पर भी रिश्वत लेने का आरोप लगा है...चिदंबरम कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाते हैं...यही वजह है कि पार्टी उनके बचाव में उतर आई है...प्रियंका गांधी, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने इसे लेकर सरकार पर हमला बोला है...कार्रवाई को राजनैतिक प्रतिशोध बताया है...हालांकि कांग्रेस नेताओं के पास इस बात का कोई जवाब नहीं कि...अगर चिदंबरम ने कोई गुनाह नहीं किया है...तो वो भागते क्यों फिर रहे हैं...कांग्रेस इसे वक्त की जिस पहेली में उलझाना चाहती है।


तस्वीरें वक्त की एक कहानी बयां जरूर कर रही हैं, लेकिन सारी कहानी सिर्फ इस बात से नहीं जोड़ी जा सकती कि ये वक्त की सियासत है...इस मसले से जुड़े कई और सवाल भी हैं....जिन पर चर्चा करेंगे...लेकिन चर्चा शुरू करने से पहले आपको बता देते हैं...ये पूरा मामला....तो सबसे पहले समझिए...चिदंबरम पर आरोप क्या है...


आइए अब आपको समझाते हैं कि चिदंबरम पर आरोप क्या लगे...और क्यों कहा जा रहा है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग किया।


वित्त मंत्री के रूप में पी चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआइपीबी) ने दो उपक्रमों को मंजूरी दी थी।


आइएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने 15 मई, 2017 को प्राथमिकी दर्ज की थी।


इसमें आरोप लगाया गया है कि चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए मीडिया समूह को दी गई एफआइपीबी मंजूरी में अनियमितताएं हुई।


इसके बाद ईडी ने पिछले साल इस संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।


अब आपको बताते हैं...कि जिस 305 करोड़ की बात की जा रही है...वो खेल असल में हुआ कैसे...कैसे ये रकम घूम कर चिदंबरम के नाम पर दर्ज हुई।


कहा जा रहा है कि 305 करोड़ विदेशी पूंजी हासिल करने के लिए FIPB की मंजूरी में अनियमितताएं की गईं...आईएनएक्स के जरिए....इसमें से एंडवाटेंज कंपनी के खाते में 3 करोड़ मिले...जो कि कार्ती चिदंबरम यानी पी चिदंबरम के बेटे से जुड़ी कंपनी थी...इस कंपनी के शेयर वासन हेल्थकेयर ने 62 करोड़ में खरीदे...इसमें सिंगापुर की आसब्रिज कंपनी का जिक्र आया..जिसमें कार्ती के दोस्त के शेयर होल्डर थे। उसके जरिए एडवांटेज और आसब्रिज से चिदंबरम के तार जुड़ गए। बाद में सारे शेयर कार्ती चिदंबरम की बेटी के नाम कर दिए जाने की बात सामने आई...जिसका सीधा फायदा पी चिदंबरम को मिला।


चिदंबरम पर आईएनएक्स मीडिया केस में आरोप लगे। ये पूरा मामला भी जरा समझ लीजिए।


आइएनएक्स मीडिया केस साल 2007 में आइएनएक्स मीडिया को मिले पैसों के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआइपीबी) से मंजूरी मिलने से जुड़ा हुआ है।


305 करोड़ रुपये के इस हाई प्रोफाइल घोटाले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का भी नाम शामिल है।


सीबीआई और ईडी केस में जांच कर रही है कि कैसे पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को 2007 में विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से आईएनएक्स मीडिया के लिए मंजूरी मिल गई थी, जबकि उस वक्त वित्त मंत्रीखुद उनके पिता पी. चिदंबरम थे।


सीबीआई और ईडी की जांच में ये पता चला कि विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से मंजूरी दिलाने के लिए आईएनएक्स मीडिया के निदेशक पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी ने पी. चिदंबरम से मुलाकात की थी, जिससेविदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से मंजूरी में कोई देरी ना हो


अब आपको सिलसिलेवार ढंग से समझाते हैं...इस मामले में ईडी और सीबीआई ने क्या कार्रवाई की....और कैसे चिदंबरम परिवार की मुश्किलें बढ़ती चली गईं...


मामले की जांच में कब क्या हुआ


सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की और आरोप लगाया कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान सन 2007 में 305 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए आईएनएक्स मीडिया समूह को दी गई विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) मंजूरी में अनियमितताएं की गईं।



2018
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने धनशोधन का मामला दर्ज किया.
23 फरवरी 2018
आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली
एक मार्च को प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होने का आदेश
कार्ति ने ईडी के समन को रद्द करने की मांग वाली याचिका दाखिल की थी


28 फरवरी 2018
जांच एजेंसियों ने कार्ति चिंदबरम को चेन्नई एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे चिदंबरम की याचिका से पहले ही कार्ती को गिरफ्तार किया गया
चिदंबरम ने कहा कि वित्त मंत्री रहते हुए 2007 में उन्होंने खुद आइएनएक्स मीडिया को फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी दी
बेटे या परिवार की किसी भूमिका से इनकार किया


9 मार्च 2018
आईएनएक्स मीडिया केस में कार्ति चिदंबरम को दिल्ली की पाटियाला हाउस कोर्ट ने सीबीआई हिरासत में भेजा
कोर्ट ने सीबीआई को कार्ति के सीए भास्करमन के सामने तिहाड़ जेल में पूछताछ की इजाजत भी दी
कार्ति को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिली
कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तार किए जाने से 20 मार्च तक के लिए अंतरिम सुरक्षा प्रदान की



12 मार्च 2018
दिल्ली की एक अदालत ने कार्ति चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज कर दी
अदालत ने कार्ति को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया
सामान्य कैदी की तरह ही तिहाड़ जेल में रखने का आदेश



23 मार्च 2018
कार्ति चिदंबरम को दिल्ली हाइकोर्ट से जमानत मिली.
कोर्ट ने कार्ति को 10 लाख के निजी मुचलके पर जमानत दी
देश से बाहर नहीं जाने के निर्देश
केस से जुड़े गवाहों और सील बैंक एकाउंट के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करने की हिदायत
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्ति और उनकी कंपनी की 1.16 करोड़की संपत्ति जब्त की



31 मार्च 2018
आईएनएक्स मीडिया मामले में अदालत ने पीटर मुखर्जी को 13 अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा
जांच एजेंसियों ने कोर्ट में याचिका दायर करके पीटर मुखर्जी को कार्ति चिदंबरम के सामने बैठाकर पूछताछ करने की इजाजत मांगी



31 मई 2018
पी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगाई
आईएनएक्स मीडिया केस में हाईकोर्ट ने चिदंबरम की गिरफ्तारी पर 3 जुलाई तक के लिए अंतरिम रोक लगा दी



6 जून 2018
चिदंबरम से सीबीआई ने चार घंटे तक पूछताछ की


25 जुलाई 2018
दिल्ली हाई कोर्ट ने पी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
ये रोक समय-समय पर बढ़ाई जाती रही


3 अगस्त 2018
कार्ति चिदंबरम की अंतरिम जमानत के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया
कार्ति को सुप्रीम कोर्ट ने व्यवसाय के उद्देश्य से 23 जुलाई से 31 जुलाई के बीच अमेरिका, फ्रांस और लंदन जाने की इजाजत दी



25 अक्टूबर 2018
आईएनएक्स मामले में जांच एजेंसी ने आरोप पत्र दाखिल किया



नवंबर 2018
दिल्ली हाई कोर्ट ने चिदंबरम को गिरफ्तारी से 15 जनवरी तक अंतरिम राहत दी



19 दिसंबर 2018
प्रवर्तन निदेशालय के समन पर पी चिदंबरम ईडी के दफ्तर पहुंचे
चिदंबरम को 305 करोड़ रूपए के INX मीडिया मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया



फरवरी 2019
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पी चिदंबरम से पांच घंटे तक पूछताछ की


19 अगस्त 2019
दिल्ली हाईकोर्ट ने पी चिदंबरम को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया


इस पूरे मामले को लेकर जाहिर है कांग्रेस में बेचैनी है....चिदंबरम का कद देखते हुए पूरी पार्टी उनके समर्थन में खड़ी हो गई है...और बीजेपी पर पलटवार कर रही है...हालांकि ये वार ट्वीटर पर ही किए जा रहे हैं...कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने चिदंबरम के समर्थन में ट्वीट करते हुए लिखा है कि


एक असाधारण योग्य और सम्मानित राज्यसभा सदस्य पी चिदंबरम जिन्होंने बतौर गृह मंत्री और वित्त मंत्री दशकों तक निष्ठा से देश की सेवा की है। जिन्होंने बेझिझक और पूरी ताकत के साथ सच बोल कर इस सरकार की नाकामी का पर्दाफाश किया है।


वहीं पार्टी के प्रवक्ता और नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी ट्वीटर पर ही सरकार के खिलाफ हल्ला बोला है...सुरजेवाला ने कहा है कि


'भारत, मोदी सरकार द्वारा सबसे खराब प्रतिशोध का गवाह बन रहा है क्योंकि भाजपा एक पुलिस राज्य चला रही है। जज ने 7 महीने के लिए फैसला सुरक्षित रखा और रिटायरमेंट से 72 घंटे पहले सीबीआई / ईडी को छापे के लिए भेजा. एक सम्मानित पूर्व वित्त मंत्री इसके शिकार हैं.'


महाराष्ट्र की सियासत से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने भी इसे लेकर ट्वीट किया है...और सरकार की कार्रवाई पर हैरानी जताई है....संजय ने लिखा है कि...


पी. चिदंबरम के लिए लुक आउट नोटिस! यह थोड़ा ज्यादा हो गया. देश के विद्वान राजनीतिज्ञ, पूर्व गृह मंत्री और वित्त मंत्री को एक चोर की तरह माना जा रहा है.'


सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि वो सरकारी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करती हैं...विपक्षी दलों पर दबाव बनाने के लिए उनका इस्तेमाल करती रही हैं...सत्ता में कोई चाहे कांग्रेस हो, बीजेपी या फिर दूसरे दल...और विपक्ष इसे लेकर पुरजोर तरीके से आवाज उठाता रहा है...लेकिन अब आपको बताते हैं कि कौन-कौन से नेताओं के खिलाफ सीबीआई जैसी बड़ी एजेंसियों ने कार्रवाई की है...और किन मामलों को लेकर


इतनी सारे बातें आपने समझ ली...अब रुख कर लेते हैं इस मसले से उठ रहे सवालों का....जिसके घेरे में चिंदबरम, कांग्रेस और सियासत का बदलापुर है....सवाल यही है कि चिदंबरम गुनहगार नहीं तो कानून से क्यों भाग रहे ?
घूसकांड के 'सरगना' चिदंबरम का बचाव कांग्रेस को बर्बाद करेगा ?
चिदंबरम पर कार्रवाई सिर्फ कानूनी या राजनीतिक प्रतिशोध ?


कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि


सियासी आरोप प्रत्यारोप अपनी जगह है, लेकिन कहा जाता है कि जब धुआं उठता है तो आग कहीं न कहीं होती है, सवाल ये है कि कार्रवाई भ्रष्टाचारियों के खिलाफ हो रही है या इसके राजनीतिक मतलब अपने हिसाब से लगाए जा रहे हैं वो इसलिए भी क्योंकि भ्रष्टाचार के कई आरोपी दूसरी पार्टियों से आकर अब भाजपा का हिस्सा हो चुके हैं । हालांकि दूसरों के दाग दिखा कर चिदंबरम या कांग्रेस अपना दामन साफ नहीं कर सकती ।