कश्मीर पर मोदी नीति से बदल गया इतिहास-भूगोल

सचिन बाजपेयी | 05 Aug 2019 07:21 PM

आज़ादी के बाद से आजतक जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को लेकर एक लंबा विवाद चलता रहा है..इस विवाद को खत्म करने के लिए जिस राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत थी वो अबतक कोई भी दल या नेता दिखा नहीं सका था लेकिन प्रचंड बहुमत से लगातार दूसरी बार सत्ता संभालने के चंद महीने के भीतर ही प्रधानमंत्री मोदी ने साबित कर दिया कि वो बड़े से बड़ा और सख्त से सख्त फैसला लेने का क्षमता उनमें है। मोदी ने देश और दुनिया में नया इतिहास रचते हुए जम्मू-कश्मीर को मिलने वाला विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया है। जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग करने का एलान भी हो गया। अनुच्छेद 370 को हटाने के अपने संकल्प और देश की भावना को मोदी इतनी जल्द पूरा कर देंगे ये शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा। हालांकि जम्मू-कश्मीर में पूरा विपक्ष इस आशंका को लेकर कई दिनों से बेचैन था लेकिन आज राज्यसभा में गृहमंत्री अमिश शाह ने मोदी के न्यू इंडिया और नए कश्मीर का एलान कर दिया। ज़ाहिर है संसद में जमकर हंगामा हुआ...और अभी इस फैसले के भीतरी और बाहरी असर को देखना बाकी है।


क्या कश्मीर पर मोदी के ऐतिहासिक फैसले से बदलेगी पूरे भारत की तस्वीर ?
सवाल ये भी है कि आखिर कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानने वाला विपक्ष क्यों कर रहा हंगामा ?
मोदी के ऐतिहासिक फैसले के असर अब कश्मीर के भीतर और सरहद पार भी देखने को मिल सकते हैं तो क्या माना जाए कि बदले हालात में भीतरी और बाहरी खतरों से आर-पार को तैयार है मोदी सरकार ?


जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले का संसद में एलान होते ही हंगामा खड़ा हो गया। गृहमंत्री अमित शाह के इस एक बयान ने पूरे देश की तस्वीर बदल दी। हिंदुस्तान का पूरा इतिहास-भूगोल बदलने का इशारा है मोदी और शाह का नया मिशन कश्मीर।


पिछले कई दिनों से कश्मीर को लेकर जो बातें हवा में तैर रही थीं वो पीएम मोदी के इस ऐतिहासिक फैसले ने पानी की तरह साफ कर दीं। कश्मीर की तमाम मुश्किलें और यहां तक कि आतंकवाद की भी बड़ी वजह माना जाने वाला देश का सबसे विवादित अनुच्छेद 370 अब इतिहास बनने की ओर बढ़ चला है।


अखंड भारत और अभिन्न कश्मीर की दिशा में मोदी के इस ऐतिहासिक कदम से पहले ही जम्मू कश्मीर में भारी सुरक्षाबल मुस्तैद किया जा चुका था। कल आधी रात सभी विपक्षी दलों के दिग्गजों महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला सरीखे नेता घर में नज़रबंद किए जा चुके


जम्मू-कश्मीर पर पीएम मोदी ने इतिहास तो रच दिया है लेकिन इस ऐतिहासिक फैसले के साथ कई अंदेशे देश के भीतर से लेकर बाहर तक बने हुए हैं। जब मुद्दा देश के हित का हो, समूचे देश की भावनाओं का हो तो कड़े फैसले लेने पड़ते हैं । राष्ट्रहित के ऐसे मसले पर विपक्ष का नकारात्मक रवैया कतई स्वीकार नहीं होना चाहिए। कश्मीर में विपक्षी नेताओं और अलगाववादियों की हरकतों के साथ ही पाकिस्तान की नापाक हरकतों से निपटना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगा। हालांकि दूरगामी नतीजों में जम्मू-कश्मीर का भारत के दूसरे केंद्रशासित राज्यों की तरह बनना असल में जम्मू-कश्मीर के लिए ही फायदेमंद होगा। विकास की राह में अब जम्मू-कश्मीर भी देश के दूसरे हिस्सों की तरह तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ेगा।