आखिरी दो दौर में बदजुबानी और निजी हमलों की होड़...

एबीपी गंगा | 08 May 2019 05:56 PM

2019 का चुनाव कई लिहाज से अहम है, 2014 के प्रचंड बहुमत के बाद दोबारा सत्ता में लौटने की चाह बीजेपी के लिए बहुमत का आसान रास्ता तैयार करेगी या कांग्रेस अपनी दुर्दशा से उबरते हुए अड़ंगा लगाएगी। इसका फैसला तो होना ही है, लेकिन इस चुनाव को सबसे ज्यादा याद करने की वजह नेताओं के ज़हरीले बयान होंगे। बड़ी बात ये कि बयान भी कार्यकर्ता या छुटभैये नेताओं के नहीं बल्कि बड़ी-बड़ी शख्सियतों के हैरान करने वाले बयान हैं। बयान देते वक्त सम्मान, संविधान और मर्यादा जैसे शब्द बौने हो गए....ऐसे में सवाल यही है कि क्या जल्लाद, औरंगजेब और दुर्योधन जैसी जुबान से मिलेंगे विपक्ष को वोट? पीएम मोदी को अपने काम का बखान करने की जगह प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जिक्र अपने प्रचार में क्यों करना पड़ रहा है? ऐसा क्यों लग रहा है कि आखिरी दो दौर के चुनाव प्रचार में बदजुबानी और निजी हमलों की होड़ सी लगी है?


ऐसी बानी बोलिए, सबका आपा खोए, आपहूं को शीतल करे... दूसरे की इज्ज़त धोए.....नहीं...नहीं कबीरदास जी ने तो ऐसा बिल्कुल नहीं लिखा था...बल्कि लोकतंत्र के महापर्व और देश के आम चुनाव में नेताओं के बोल ही कुछ ऐसे हैं कि न चाहते भी लगता है कि ये बात कुछ ऐसी ही सही है।


सियासत में तारीख के मुताबिक तेवर दर्ज होते हैं...तभी पीएम मोदी विपक्ष पर हमले करते हैं। तो पीढ़ियों का हिसाब होता है। मुद्दों की सियासत करने वाले नेता एक दूसरे से नफरत पर उतर आए हैं और नफरत भी ऐसी कि पद, सम्मान, संविधान और मर्यादा को ठोकर मार कर एक दूसरे के ख़िलाफ ज़हर उगल रहे हैं और ज़हर भी इतना ख़तरनाक जिसका असर चुनावों बाद भी महसूस किया जाएगा। अब जैसे बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी के इसी बयान की ताप को महसूस करिए। एक पूर्व मुख्यमंत्री का वर्तमान प्रधानमंत्री पर ये टिप्पणी शर्मनाक लग सकती है। ज़ाहिर है बीजेपी को लगी भी, लेकिन ये सिर्फ इकलौता टिप्पणी का मामला नहीं है। पीएम के ही संसदीय क्षेत्र में उन पर हमले करने वाले कांग्रेस के नेता संजय निरुपम जब उन्हें औरंगजेब से तौलते हैं तो संसदीय मर्यादा की लकीर पार करने में गुरेज नहीं करते।


आधुनिक काल खंड के हिसाब से विपक्षों के हमलों का जवाब प्रधानमंत्री देने से गुरेज नहीं करते विपक्ष ये बखूबी जानता है। इसीलिए कलयुग की इस लड़ाई को द्वापर युग तक खींच लिया गया है खुद प्रियंका गांधी ने पीएम पर अंहकारी होने का आरोप लगाया है और अहंकार भी महाभारत के सबसे अराजक किरदार दुर्योधन के जैसा विराट। प्रियंका को पीएम नहीं बल्कि पार्टी अध्यक्ष ने जवाब दिया और 23 मई को इंतज़ार करने को कहा है।


बहरहाल, जंग के आखिरी दौर में पहुंचते ही नेताओं की आक्रामकता बढ़ गई है क्योंकि चुनाव में एक चौथाई सीट के लिए जोर आजमाइश है। लिहाजा सभी के लिए ये गिनती बेहद अहम है। यही वजह है कि अहम टकरा रहे हैं और फलक पर छाए हुए हैं। नेताओं के नाम और उनके बयान...