सियासत को दरकिनार कर उन्नाव की बेटी को मिले इंसाफ

सचिन बाजपेयी | 31 Jul 2019 07:37 PM

नेताओं की सियासत हमारी-आपकी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए होती है, होनी भी चाहिए..इसीलिए हम अपने नुमाइंदे चुनते हैं लेकिन आज राजनीति में बात उस सियासत की जिसने सरकार और प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। यूपी की एक बेटी वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। पूरा प्रशासन, पूरी सरकार उसकी जान बचाने का दम भर रही है। उसे इंसाफ दिलाने का दावा कर रही है, जिस एक्सीडेंट ने यूपी की उस बेटी को वेंटिलेटर पर पहुंचाया वो एक्सीटेंड एक गहरी साजिश का हिस्सा हो सकता है इसकी जांच का जिम्मा सीबीआई को दे दिया गया है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी वो मासूम बेटी चीख रही है इंसाफ के लिए...त़ड़प रही है जिंदगी के लिए..क्योंकि उसके सवाल भी तो इसी सरकार...इसी प्रशासन..इसी सीबीआई को लेकर हैं।


सत्ताधारी भाजपा का ही एक विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उस बेटी की आबरू लूटने के इल्ज़ाम में जेल में है और अब हादसे की पूरी कहानी उसी भाजपा विधायक की साजिश का हिस्सा मानी जा रही है..जिसने पीड़िता को मौत के मुहाने पर पहुंचाया गया। एक अहम गवाह को मौत के मुंह में पहुंचाया गया और पीड़िता का वकील भी गंभीर हालत में अस्पताल में है। सवाल ये है कि जब रेपकांड की जांच सीबीआई कर रही थी, जब वो बेटी सरकार और प्रशासन को बार-बार चिट्ठियां लिखकर विधायक और उसके परिजनों से मिल रही धमकी के बारे में आगाह कर रही थी, सुरक्षा की गुहार लगा रही थी तो कैसे हो गया ये जानलेवा एक्सीडेंट..जो असल में किसी साजिश का हिस्सा निकले तो हैरानी नहीं होगी।
अस्पताल में वेंटिलेटर पर पड़ी उस मासूम और पूरे प्रदेश का सवाल यही है कि


विधायक की धमकी के बावजूद रेप पीड़ित की गुहार पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई ?
यूपी सरकार और प्रशासन से लेकर सुप्रीम कोर्ट के अफसर तक पीड़ित के गुनहगार क्यों ना माने जाएं?
और.. क्या उन्नाव की उस बेटी को दो-दो सीबीआई जांच दिला पाएगी इंसाफ?


यूपी की राजधानी लखनऊ से महज 60 किमी की दूरी पर सीबीआई के अफसरों की ऐसी चहलकदमी दो साल पहले भी थी। तब उन्नाव के माखी गांव की एक पीड़िता अपने खिलाफ हुई नाइंसाफी को लेकर आवाज बुलंद कर रही थी। एक रसूखदार विधायक के खिलाफ...अब दो साल बाद एक बार फिर सीबीआई चहलकदमी कर रही है, क्योंकि उन्नाव की ही पीड़िता की आवाज बंद करने की कोशिश की गई है।


और अब इसी की जांच करने सीबीआई रायबरेली पहुंच गई है। हालांकि ये दूसरी जांच है। इससे पहले रेप केस की सीबीआई जांच चल रही है लेकिन ये जांच हादसे या फिर किसी साजिश की संभावनाओं का पर्दाफाश करने के लिए है। हालांकि सरकार के दावों को लेकर भी सियासत शुरू हो गई है, सपा समेत दूसरी विपक्षी पार्टियां सरकार पर कार्रवाई के लिए दबाव बना रही हैं। वहीं पीड़ित परिवार का भी साफ-साफ कहना है कि इस मामले में कुलदीप सिंह सेंगर पर कार्रवाई हो...क्योंकि ये हादसा उन्हीं के इशारे पर किया गया है। इससे पहले भी विधायक पर केस वापस लेने का दबाव डालने के लिए धमकी देने का आरोप है, जिसकी शिकायत लगातार पीड़ित परिवार कर रहा था मगर किसी ने सुना नहीं।


अखिलेश यादव जहां इस मामले को लेकर राज्यपाल के पास पहुंच गए, तो वहीं बसपा प्रमुख मायावती ट्वीटर पर ही इसे लेकर हमलावर हैं।


इस पूरे मामले में पुलिस पर भी बड़ी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। पुलिस को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सीबीआई न केवल विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से पूछताछ कर सकती है बल्कि पीड़ित को दी गई सुरक्षा के तौर पर गनर्स से भी पूछताछ करने वाली है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता की चिट्ठी पर गौर फरमाया है। गुरुवार को इस मामले में सुनवाई करेगी। अब तक कानों में तेल डाले बैठी पुलिस, अब सब कुछ दुरुस्त करना चाहती है।


उन्नाव केस पीड़ित को इंसाफ का मौका मिलेगा या नहीं ये ऊपरवाले पर हैं क्योंकि वेंटिलेटर पर पड़ी ज़िंदगी हर पल इंसाफ से दूर होती जा रही है और इस पूरे मामले में गरमाई सियासत इंसाफ की इस लड़ाई को घूमाने में जुटी है, लेकिन सीबीआई की जांच और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई इंसाफ को नई ज़िंदगी दे पाएगी,इसका इंतज़ार करना होगा और ये वक्त पीड़ित को मिलेगा या नहीं ये डॉक्टर ही बता सकते हैं।


उन्नाव की रेप पीड़िता के साथ हुए हादसे में सीधे-सीधे साजिश की बू आ रही है। तमाम सरकारी एजेंसियां, प्रशासन और सरकार की भूमिका भी संदेह से परे नहीं है। ऐसे में सिर्फ आरोपी विधायक ही नहीं, सिस्टम से जुड़े हर उस शख्स पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि ये एक मिसाल बने। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर मुख्यमंत्री योगी तक बेटियों की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद हैं और ऐसे में एक बेटी के साथ इतनी घिनौनी साजिश जिसमें आरोपी भी भाजपा विधायक ही है। पार्टी को भी चाहिए कि ऐसे विधायक को फौरन पार्टी से हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखाए। सीबीआई को भी ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करके इंसाफ की मशाल को बुलंद करना चाहिए।