‘अमेठी चला बंगाल की राह, बना हिंसक राजनीति का एतिहासिक गवाह’

अमेठी में पूर्व प्रधान की हत्या के बाद जिले में इसे लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। शक ये भी जताया जा रहा है यह एक चुनावी रंजिश का नतीजा है। बहरहाल अमेठी में एक शांतिपूर्ण तनाव है।

By: एबीपी गंगा | Updated: 26 May 2019 05:33 PM
Murder in Amethi  political violence!

लखनऊ,एबीपी गंगा। अमेठी में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की सियासी लड़ाई खूनी जंग में बदलती दिख रही है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की हार ने राजनीतिक इतिहास बदल दिया है। इस हार के बाद अमेठी में सनसनीखेज हत्याकांड से यहां के लोग सकते में हैं। चुनाव खत्म होने के बाद भाजपा कार्यकर्ता की हत्या ने सूबे की सियासत में खलबली मचा दी है। गौरतलब है कि शनिवार देर रात स्मृति ईरानी के नजदीकी रहे पूर्व प्रधान की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पूरे जिले में इस घटना के बाद हालात तनावपूर्ण हैं। सुरेंद्र सिंह के परिजनों का आरोप है कि उनकी हत्या चुनावी रंजिश के चलते हुई।


मारे गये पूर्व प्रधान के बेटे का आरोप है कि इस घटना में कांग्रेस का हाथ है। हालांकि अभी तक कुछ भी साफ नहीं हो सका है, कि हत्यारे कौन है,उनका मकसद क्या था। चुनावी रंजिश में हत्या और हिंसा का दौर नया नहीं है। इससे पहले पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के दौरान जमकर हिंसा हुई। इस दौरान भाजपा के कई कार्यकर्ताओं मारे गये। टीएमसी और भाजपा के लोगों में हिंसक झड़पों की खबरें आईं।


राहुल की जबरदस्त हार


इससे पहले गांधी परिवार के गढ़ रहे अमेठी का हार जाना एक अभूतपूर्व घटना थी। राहुल गांधी यहां से लगातार तीन बार सांसद रहे हैं। अमेठी की हार कांग्रेस को तोड़ देनेवाली है। यही नहीं क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं में हार को लेकर गहरी निराशा है। इसे नकारा नहीं जा सकता है।


राहुल ने 2009 में यह सीट 3,50,000 से भी ज्यादा वोटों से जीती थी। कांग्रेस अध्यक्ष यहां से पहली बार 2004 में चुन कर संसद पहुंचे थे। अमेठी के लोगों का कहना है कि राजीव गांधी के समय शुरू की गयी कई परियोजनाएं और कार्यक्रम राहुल के सांसद रहते एक एक करके बंद होते गये। इससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा। इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने रोजगार के लिए अमेठी से पलायन किया।


भाजपा का बंगाल में शानदार प्रदर्शन


पिछले लोकसभा चुनाव में बंगाल के अंदर सिर्फ 2 सीट हासिल करनेवाली भारतीय जनता पार्टी ने इस बार राज्य में जबरदस्त प्रदर्शन कर ममता के किले में सेंध लगा दी। लेकिन, लोकसभा चुनाव के दौरान इस बार गलत वजहों से पश्चिम बंगाल लगातार सुर्खियों में बना रहा। वहां से सिर्फ हिंसा और बवाल की खबर हर चरण, हर रैली और हर हफ्ते आती रही। पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं और इस बार यहां पर सात चरणों में वोटिंग कराई गई है।


इस बार के चुनाव में यहां पर हत्या, आपसी टकराव, पत्थरबाजी, लाठीचार्ज, फायरिंग इसके गवाह रहे। भाजपा, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों ने एक दूसरे के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर हत्या और पिटाई करने का आरोप लगाया। लेकिन, इस हिंसा की शुरुआत दरअसल पिछले साल हुए पंचायत चुनाव के दौरान ही हो गई थी। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक करीब पचास लोग इस चुनाव के दौरान मारे गए थे।


पश्चिम बंगाल में हर चरण में हुआ बवाल


पश्चिम बंगाल एक ऐसा राज्य है जहां तकरीबन लोकसभा चुनाव के हर चरण में भारी हिंसा देखने को मिली और यहां के सियासी मैदान में उतरे उम्मीदवारों पर हमले किए गए, उनकी गाड़ियों को क्षतिग्रस्त किया गया और राजनीतिक समर्थकों की जमकर पिटाई की गई। लेकिन सबसे बड़ा बवाल आखिरी चरण के चुनाव प्रचार से ठीक पहले उस वक्त देखने को मिला जब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कोलकाता रोड शो में उनके ट्रक के ऊपर डंडे फेंके गए।


अमेठी में हुई इस हत्या के बाद चुनावी रंजिश बढ़ने का खतरा लगातार मंडरा रहा है। हालांकि प्रशासन और सरकार दोनों हरकत में आ गये हैं। दावा किया जा रहा है कि हत्यारों की पहचानकर उन्हें जल्द पकड़ा जाएगा। राज्य के डीजीपी ओपी सिंह खुद इसे मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।