आगरा: चंबल का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचा, दहशत में ग्रामीण, प्रशासन सतर्क

आगरा में चंबल नहीं खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। तटीय इलाकों में रहनेवाले ग्रामीण इन हालातों को देखकर दहशत में हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिये प्रशासन अलर्ट है।

By: एबीपी गंगा | Updated: 18 Aug 2019 08:25 PM
Chambal river flows near to danger mark in Agra

आगरा, नितिन उपाध्याय। राजस्थान और मध्य प्रदेश में भारी बारिश के चलते आगरा जनपद के पिनाहट, बाह के चंबल में उफान के चलते बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं। शनिवार की रात चंबल का जलस्तर खतरे के निशान को छू चुका है। शनिवार रात भर तटवर्ती गांवों के लोगों ने दहशत में रात गुजारी है। दर्जनभर गांवों के संपर्क मार्ग पूरी तरह से डूब चुके हैं। घर में भी पानी घुसने लगा है रात भर ग्रामीणों ने ऊंचे टीलों पर खड़े होकर दहशत भरी रात गुजारी है।


करीब आधा दर्जन गांवों की बिजली भी काट दी गई है। अंधेरे में डूबे रहे दहशत भरे यह गांव बचे कुचे राशन पानी के भरोसे हैं। हालांकि प्रशासन की टीम भी गांव का निरीक्षण कर रही है। गोहरा, गुड़ा , रानीपुरा, भटपुरा में वन विभाग के स्ट्रीमर सेवा चालू कर दी गई है। स्ट्रीमर के सहारे इन गांवों में डॉक्टर की टीम जरूरी सामान केरोसिन आदि की व्यवस्था की गई है। वही कछियारा, रेहा, बीच का पुरा, उमरैठा पुरा आदि गांव में भी प्रशासन की टीम चौकी बनाकर निगरानी कर रही है।


चंबल नदी में चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। किसानों की हजारों बीघा जल फसल भी जलमग्न हो गई है टीनों पर चढ़कर रात गुजारने को मजबूर किसान और भी दहशत में हैं। शनिवार को फिर से 9682 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था जो आज शाम तक बात चित्र में पहुंचने के आसार हैं। इसके बाद तटवर्ती गांवों में खतरा और बढ़ जाएगा पहले से ही चंबल का पानी खतरे के निशान को छू चुका है ऐसे में और तेजी से आ रहे पानी से चंबल में क्या हालात होंगे इसे सोच कर ग्रामीण दहशत में हैं और प्रशासन के भी हाथ-पांव फूले हुए हैं ।


घरों में कैद मासूम जिंदगी आंखों में भरी है दहशत


आगरा जनपद के बाह क्षेत्र के गोहरा, गुड़ा रानीपुरा भटपुरा उमरैठा पुरा ,बीच का पुरा, रेहा, कच्छीआरा, डोंगरा गांव में ग्रामीणों के साथ साथ स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे भी घरों में कैद हो गए हैं> उन्होंने पहली बार अपने आशियाने के आसपास इतना भीषण पानी देखा है। पूरी रात यह नौनिहाल जागते रहे। इन गांवों में चारों ओर से पानी भर गया है और अब तो घर में भी पानी आना शुरू हो गया है। बड़ी मेहनत से ग्रामीणों ने चंबल के तटवर्ती क्षेत्र में बाजरे की फसल बोई थी यह फसल पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। ऐसे में चंबल के जलीय जीवो के गांवों में घुसने के आसार बन गए हैं। लोगों में इसको लेकर भी दहशत का माहौल है रात भर लाठी-डंडों क्लारी को हाथ में लेकर अपने पशु और बच्चों की रखवाली करते नजर आए।


चंबल नदी में रोजना लगातार राजस्थान के कोटा बैराज से पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे चंबल नदी में पानी बढ़ने की संभावना है, कोटा बैराज से अब लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। गुरुवार को 113000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था उसके बाद शुक्रवार को 9618 क्यूसेक पानी छोड़ा गया और आज रविवार को भी कोटा बैराज से करीब 7000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। कोटा बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी से चंबल में और हालात बिगड़ने की संभावना है।


पहले से ही यह गांव पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में हैं। ऐसे में लगातार पानी छोड़े जाने पर गांवों में हालात और खराब होंगे, प्रशासन द्वारा तटवर्ती इलाकों में लेखपालों एवं ग्राम पंचायत सचिवों को चौकियां बनाकर तैनात किया गया है और चंबल के जलस्तर पर निगाह बनाने के साथ ग्रामीणों को सुविधा मुहैया कराने के लिए निर्देशित किया गया है, खेड़ा राठौर के गांव गोहरा में चंबल के पानी से गांव का रास्ता बंद हो जाने के कारण प्रशासन द्वारा स्ट्रीमर संचालन किया गया है जिससे गांव वालों को गांव तक लाया और ले जाया जा सके प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद दिखाई दे रहा है, जिन गांव से तहसील मुख्यालय से संपर्क कट गया है और गांव पर विशेष ध्यान प्रशासन के अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा रखा जा रहा है गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी तैनात की गई है।